कोरोना काल में बड़ी संख्या में ऐसे बच्चे सामने आ रहे हैं जिन्होंने या तो अपने माता-पिता को खोया है या अकेले कमाई करने वाले पिता को गंवाया है। ऐसे लाचार बच्चों को मदद की दरकार है। अमर उजाला ने ऐसे बच्चों को ढूंढने का बीड़ा उठाया तो कुछ संस्थाएं और व्यक्ति मदद के लिए भी आगे आए हैं। पाठकों के सहयोग से हमारा यह अभियान जारी रहेगा।
उत्तराखंड में कोरोना महामारी ने जिन बच्चों से उनके माता-पिता को छीन लिया है। अमर उजाला ने उनकी पहचान के लिए यह अभियान शुरू किया है। ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी हो तो हमें
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अमर उजाला अपनत्व अभियान: सामने आए कोरोना काल में माता-पिता गंवाने वाले बच्चे, अब 'वात्सल्य' दिखाइए सरकार
नई टिहरी के पिपली गांव में कोरोना संक्रमण से तीन बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। खेलने-कूदने की उम्र में बच्चे जिंदा रहने के लिए कठिन संघर्ष करने को विवश हैं। विपदा की इस घड़ी में बच्चों के सामने किसी मदद के हाथ का इंतजार है।
विकासखंड चंबा के सारज्यूला पट्टी के पिपली गांव निवासी विजयपाल सिंह सजवाण (42) पुणे होटल में नौकरी करता था। लॉकडाउन के बाद विजयपाल सात अप्रैल को अपने गांव लौटा था। कोरोना की स्थिति सामान्य होने के बाद उसे वापस पुणे जाना था, लेकिन 9 अप्रैल को अचानक स्वास्थ्य बिगड़ा। सांस लेने में उन्हें काफी दिक्कतें आई। जांच को अस्पताल पहुंचे, तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
हालत गंभीर होने पर उसे ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया। पत्नी बीना देवी और तीनों बच्चे पिता विजयपाल के स्वस्थ होकर घर लौटने की प्रतीक्षा कर रहे थे, लेकिन ऊपर वाले को शायद कुछ और ही मंजूर था। 27 अप्रैल को अस्पताल से विजयपाल की मौत की खबर आते ही घर में अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
पत्नी बीना गहरे सदमे में है और रो-रोकर उसका बुरा हाल है। सवाल यह भी है कि पिता की मौत के बाद मानसी (16), साक्षी (12) और सात साल के अभिनव का पालन-पोषण आखिर कैसे होगा। तीन बच्चों की स्कूल फीस बीना देवी कहां से देगी। परिवार के पास आजीविका का कोई अन्य साधन नहीं है।
बसंती के कंधों पर दो बच्चों और बुजुर्ग सास की जिम्मेदारी
ऋषिकेश होटल में नौकरी कर बड़ेडा मल्ला (सल्डोगी) का 35 वर्षीय दीवान सिंह पत्नी, दो बच्चे और बुजुर्ग मां के साथ किसी तरह गुजर-बसर कर रहा था, लेकिन कोरोना ने इस परिवार के कमाऊ मुखिया को छीन लिया। अब दो मासूम बच्चों के साथ बुजुर्ग सास की जिम्मेदारी बसंती देवी के कंधों पर आ गई है।
नरेंद्रनगर ब्लॉक में बड़ेडा मल्ला गांव के दीवान सिंह पुत्र मोर सिंह कब कोरोना वायरस की चपेट में आ गया पता ही नहीं चला। बुखार की शिकायत होने पर उसने 13 मई को ही कोरोना जांच कराई थी। 14 मई को ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान वह 15 मई को कोरोना से जिंदगी की जंग हार गया।
घर में खेती बाड़ी का काम संभाल रही उसकी पत्नी बसंती देवी, उसका चार साल का बेटा सक्षम और पांच महीने का साकेत के साथ ही बुजुर्ग मां कमला देवी (66) पूरी तरह से दीवान सिंह पर ही निर्भर थे। बसंती का शादीशुदा देवर प्रताप भी बेरोजगार ही है। ऐसे में कहीं से मदद की कोई उम्मीद नहीं है।
आठ वर्षीय बच्चे के साथ खुद को कैसे संभालेगी पूजा
नई टिहरी में चंबा ब्लॉक के नागणी क्षेत्र के चोपड़ियाली गांव का युवक दिल्ली नौकरी करने गया था। परिवार की सभी जरूरतें पूरी हो रही थी, लेकिन कोरोना ने परिवार की खुशियां छीन ली। गजा क्षेत्र के ग्राम गौंसारी निवासी मान सिंह चौहान ने बताया कि उनका दामाद चोपड़ियाली गांव निवासी मनवीर सिंह पयाल (38) पुत्र सूरत सिंह दिल्ली में बजाज एलियांज कंपनी में कार्यरत थे। वहां वह पत्नी पूजा और आठ वर्षीय बेटे सिद्धार्थ के साथ रह रहा था।
छोटे भाई की शादी के लिए वह पिछले माह 26 अप्रैल को गांव आए। उसके कुछ दिन बाद बुखार की शिकायत होने पर चंबा में कोरोना जांच कराई। तीन मई को सांस लेने में दिक्कत होने लगी, तो नरेंद्रनगर कोविड केयर सेंटर में भर्ती कराया गया, लेकिन स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ। छह मई को उन्हें देहरादून रेफर किया गया। पूजा पति के स्वस्थ होकर घर लौटने का इंतजार कर रही थी, लेकिन 20 मई को उनकी मौत खबर आई।
आठ साल के मासूम सिद्धार्थ के सिर से पिता का साया उठ गया। अब पूजा के सामने बच्चे के भविष्य को संवारने की चुनौती है। मनवीर की मौत के बाद अब परिजनों और नाते-रिश्तेदारों को बस एक ही चिंता सता रही है कि पूजा अबोध बेटे के साथ खुद को कैसे संभालेगी।