हरिद्वार कुंभ से लौटकर देश के विभिन्न राज्यों में पहुंचने वाले संतों और लोगों ने भी संक्रमण की चपेट में आने से जान गंवाई। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुंभ आयोजन को कोविड का सुपर स्प्रेडर कहा गया। सरकार से लेकर मेला प्रशासन और संतों को इसके बचाव में उतरना पड़ा। सरकार ने कोविड सुपर स्प्रेडर के दावों को खारिज कर दिया। संतों की ओर से भी इसे हरिद्वार को बदनाम करने की साजिश बताया गया। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों का झुठलाया नहीं जा सकता है।
मार्च 2020 से एक अप्रैल 2021 तक जिले में कुल पॉजिटिव मरीजों की संख्या 14472 थी। तब तक कुल 654807 कोविड जांचें हुई थी और संक्रमण कर दर 2.21 फीसदी थी। यानी 13 महीनों में प्रतिदिन औसतन 37 मरीज मिले थे। लेकिन अकेले अप्रैल माह (कुंभ अवधि) में 17317 नए मरीजों के साथ जिले में पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा बढ़कर 31789 पहुंच गया। कुंभ अवधि में 600831 कोविड जांच हुई थी। जांच रिपोर्ट के फर्जीबाड़े से संक्रमण की दर भले ही 2.88 फीसदी रही, लेकिन औसतन रोजाना 577 नए मरीज आए।
हरिद्वार कुंभ अवधि में संक्रमण की दर 2.88 फीसदी हैरानी वाली थी। इस अवधि में राज्य के अन्य 12 जिलों की औसत संक्रमण की दर 14 फीसदी से अधिक थी। कोविड जांच के इस खेल की अलग-अलग स्तरों पर जांच बैठ गई है। 11 लैब में दो लैब की भूमिका संदिग्ध बनी है। 11 लैबों ने दो लाख 51 हजार कोविड जांचें की थी। इनमें अकेले दो लैब ने एक लाख 23 हजार कोविड जांचें की हैं। इनमें एक लाख जांचें फर्जी होने की आशंका जताई रही है।
कुंभ शुरू होने से पहले और खत्म होने तक कोविड की स्थिति
तारीख- कुल पॉजिटिव मरीज कुल कोविड जांच
01 अप्रैल- 14472 654807
30 अप्रैल- 31789 1255638