1. तीर्थयात्रियों और स्थानीय जनसंख्या का उचित रूप से परीक्षण किया जाए। आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों के अनुसार वर्तमान में आरटीपीसीआर परीक्षण बढ़ाया जाए।
2. मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का सख्ती से पालन करें।
3. स्थानीय लोगों को खुद ही रिपोर्टिंग करने के लिए जागरूक करें।
4. अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में प्रारंभिक चेतावनी के लिए व्यवस्था की जाए।
5. संभावित उच्च संचरण क्षेत्रों में परीक्षण बढ़ाया जाए।
5. पवित्र स्नान से पहले और बाद में फ्रंटलाइन श्रमिकों का परीक्षण जारी रखा जाए।
6. गंभीर रोगी की देखभाल और उपचार सुविधाओं की व्यवस्था।
7. मीडिया का उपयोग करके प्रभावी जोखिम संवाद बनाया जाए।
8. कोविड के मामले बढ़ते हैं तो एनसीडीसी से सलाह लेकर जीनोम सिक्यूवेंसिंग की जाए।