जहां कई घंटों तक आयकर विभाग की टीम ने दस्तावेज खंगाले। सहायक आयुक्त विनोद कुमार आर्य ने बताया कि फर्म की प्राथमिक जांच में फर्म के अस्तित्वहीन फर्मों से खरीद प्रदर्शित करते हुए बोगस का लाभ लिए जाने की बात सामने आई।
प्रथम दृष्टया करीब चार करोड़ की टैक्स चोरी सामने आई। इसके सापेक्ष फर्म स्वामी की ओर से मौके पर ही 25 लाख कर के रूप में जमा कराए गए। साथ ही फर्म की ओर से जा रही खरीद-बिक्री की विस्तृत जांच चल रही है।
इस दौरान उपायुक्त कार्तिकेय वर्मा, सहायक आयुक्त विनोद कुमार आर्य, सहायक आयुक्त टीका राम चन्याल, राज्य कर अधिकारी हरिकृष्ण खुगशाल, राज्य कर अधिकारी अविनाश कुमार झा मौजूद रहे।