गंगा के प्रति मोदी का प्रेम चुनाव से पहले हुई जनसभाओं और चुनाव जीतने के बाद साफतौर पर देखा गया।
तीन मई को रुड़की में हुई सभा में मोदी ने कहा कि वह गंगा मैया की गोद में आए हैं। वाराणसी में उन्होंने कहा कि उन्हें मां गंगा ने बुलाया है।
चुनाव जीतने के बाद रविवार को गंगा आरती के अवसर पर उन्होंने काशीवासियों के सहयोग से गंगा सफाई की बात कही। लेकिन गंगा तो अपने उद्गम स्थल गंगोत्री से ही मैली हो चुकी है।
इसे प्रदूषण से बचाना है तो हमें गंगोत्री से ही अभियान की शुरुआत करनी होगी। हरिद्वार में ही कई गंदे नाले सीधे गंगा जी में गिर रहे हैं।
20 एमएलडी मलजल प्रतिदिन गिरता है
हरिद्वार में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का अभियान वर्ष 1986 में शुरू हुआ था। तब से आज तक (करीब 28 वर्ष) गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए कई योजनाओं पर काम चल रहा है।
लेकिन सच्चाई यह है कि हरिद्वार में ही करीब 20 एमएलडी मलजल प्रतिदिन गंगा में बहाया जा रहा है। (65 एमएलडी मलजल में से केवल 45 एमएलडी मलजल का ही ट्रीटमेंट किया जा रहा है)।
गंगा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए बनाई गई कार्यदायी संस्था गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने तो अपना नाम ही बदल कर अब निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) कर दिया है।
हरकी पैड़ी के अपस्ट्रीम में भूपतवाला व सप्तसरोवर का बहुत बड़ा हिस्सा सीवरेज की सुविधा से वंचित हैं। भूपतवाला के बड़े क्षेत्र को अब तक सीवर सुविधा नसीब नहीं हुई है।
बड़े-बडे़ होटल व व्यावसायिक प्रतिष्ठानवाले रात को सीवर नालों में पंप करने को मजबूर हैं।
ललतारौ से मल, ऋषिकुल से केमिकल
यूं तो ललतारौ नदी सूखी नदी है। इसके दोनों ओर बस्तियां हैं। इनका मलजल और रेलवे कालोनी व निर्मला छावनी का मलजल भी ललतारौ में छोड़ा जा रहा है।
बिरलाघाट व गुजरांवाला भवन के बीच से सारा गंध गंगा में बहाया जा रहा है। ऋषिकुल नाला औद्योगिक क्षेत्र हरिद्वार में आता है। इस नाले में कारखानों से छोड़ा जा रहा केमिकल आगे गंगा को प्रदूषित कर रहा है।
ज्वालापुर के कस्सावान नाले की गंदगी और पंतद्वीप वाहन पार्किंग की गंदगी गंगा में गिर रही है। ललतारौ व ऋषिकुल नालों को गंगा में जाने से रोकने के लिए दो पंपिंग स्टेशन तो बनाए हैं। लेकिन ललतारौ नदी को उससे नहीं जोड़ा गया है।
सराय में बना ट्रीटमेंट प्लांट
ज्वालापुर का मलजल गंगा में जाने से रोकने के लिए सराय में 18 एमएलडी का नया ट्रीटमेंट प्लांट बन चुका है।
इसके चालू होने से गंगा में गिर रही गंदगी से कुछ राहत मिलेगी। ज्वालापुर में पंपिंग स्टेशन काफी पहले बन चुका था, लेकिन ट्रीटमेंट प्लांट न होने के कारण उसका बनना न बनना एक जैसा ही है।
525 करोड़ का मास्टर प्लान
निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा) ने सीवरेज सुविधा से वंचित हरिद्वार व शिवालिकनगर क्षेत्र के लिए 525 करोड़ रुपए का मास्टर प्लान तैयार किया है।
इसमें भूपतवाला में सप्तऋषि से दूधाधारी चौक तक ट्रंक सीवर, चंडीघाट क्षेत्र में एक बड़ा ट्रीटमेंट प्लांट, पंपिंग स्टेशन और पूरे क्षेत्र में सीवर लाइन डालने का काम शामिल है।
शिवालिकनगर क्षेत्र में ट्रंक सीवर लाइन के साथ पंपिंग स्टेशन और कालोनियों व घरों को सीवर सुविधा से जोड़ा जाना भी है।
इस संबंध में परियोजना प्रबंधक वाईके मिश्रा का कहना है कि इस मास्टर प्लान पर वित्तीय वर्ष 2015-16 से काम शुरू हो जाएगा। इसके बाद हरिद्वार में गंगा मैली की शिकायत भी दूर हो जाएगी।
गंगा को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने का समय आया
बाबा रामदेव ने कहा कि गंगा के प्रति नरेंद्र मोदी की व्यथा जगजाहिर हो गई है।
वस्तुत: अब गंगा को राष्ट्रीय नदी नहीं अपितु राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने का समय आ गया है। मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही गंगा रक्षा का अभियान भी गति पकड़ेगा।
रविवार को दूरभाष पर ‘अमर उजाला’ से बातचीत में स्वामी रामदेव ने कहा कि चार वर्ष पहले उन्होंने देश की कई हस्तियों से मिलकर गंगा रक्षा अभियान की शुरूआत की थी। गंगा को केवल जल नहीं अपितु पवित्र जल समझना होगा।
पवित्रता की बात जब तक समझ नहीं आएगी तब तक रक्षा भी नहीं हो पाएगी। गंगा को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर उसे प्रदूषित करने वालों के खिलाफ दंड की व्यवस्था करनी पड़ेगी।
गंगातटों की रक्षा के लिए अलग से बल गठित करना चाहिए। यह कार्य केवल मोदी कर सकते हैं। बाबा रामदेव ने कहा वे स्वयं सोमवार को नमन करने हरकी पैड़ी आ रहे हैं।