हरक सिहं के पीआरओ युद्धवीर की मौत 14 लाख रुपये लूट की ओर भी इशारा कर रही है। यह नकदी उसे एक मेडिकल कालेज में एक छात्रा के दाखिले के लिए दिए जाने की बात सामने आ रही है, लेकिन अब यह राशि गायब है। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है।
युद्धवीर का शव मिलने के बाद पुलिस ने उसके मोबाइल पर दर्ज काल की जांच की तो उसमें हिमाचल प्रदेश के पांवटा निवासी बलराज पाल का नंबर मिला। पुलिस ने पूछताछ की तो बलराज ने बताया कि वह अपनी भांजी को एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के लिए बृहस्पतिवार सुबह दून आया था।
एडमिशन की बात कहकर घर से निकला
सुबह आठ बजे वह यमुना कालोनी पहुंचा और रावत को पांच लाख का ड्राफ्ट दिया। बलराज के मुताबिक ड्राफ्ट के अलावा उसने रावत को 14 लाख रुपये कैश भी दिए थे। इसके बाद रावत एडमिशन कराने जाने की बात कहकर घर से निकल गया। बलराज के मुताबिक दोपहर तक रावत का फोन नहीं आया तो उसे चिंता होने लगी। कई बार कॉल करने पर भी रावत ने उसका फोन नहीं उठाया।
बलराज ने बताया कि रात 11 बजे रावत का फोन स्विच ऑफ हो गया तो वह सो गया। बलराज के बयान ने मामले में एक नया पहलू जोड़ दिया। आशंका जताई जा रही है कि रावत की हत्या 14 लाख रुपये लूटने के बाद की गई। इस बाबत एसएसपी केवल खुराना का कहना है कि अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन, पुलिस को कुछ प्वाइंट्स मिले हैं, जिनके आधार पर जांच की जा रही है।
मंत्री के पीएसओ ने छोड़ा था दरबार साहिब
बलराज ने पुलिस को बताया कि बृहस्पतिवार दोपहर कई बार फोन करने पर भी जब युद्धवीर ने फोन नहीं उठाया तो उसने तीन बजे कृषि मंत्री के पीएसओ प्रदीप चौहान को फोन किया। बलराज के मुताबिक चौहान ने बताया कि रावत उनके साथ ही था। दोपहर दो बजे बाद चौहान ने उसे दरबार साहिब में छोड़ा था। इसके बाद वह कहां गया चौहान को पता नहीं था।
माली का फोन भी ले गया था
युद्धवीर के पास दो सिम थे, जो एक ड्युअल सिम फोन में लगे थे। लेकिन, बृहस्पतिवार सुबह घर से निकलने के दौरान रावत ने अपने माली से उसका मोबाइल फोन और सिम मांगा। माली ने पुलिस को बताया कि उसने दोनों चीजें रावत को दे दीं। इसके बाद रावत निकल गया। माली के मुताबिक रावत ने इससे पहले कभी उससे फोन नहीं मांगा था, जबकि उसके दोनों नंबर उस वक्त चालू थे।
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