उत्तराखंड से लगी चीन सीमा पर मोटर मार्गों की हालत को सुधारने के लिए
आईटीबीपी के जवानों ने स्वयं ही मोर्चा संभाल लिया है। आईटीबीपी के जवान
नीती घाटी में क्षतिग्रस्त पड़े सुमना-लपथल मोटर मार्ग के पांच सौ मीटर भाग
को पैदल आवाजाही के लिए खोल चुके हैं, जबकि एक किमी भाग पर कार्य चल रहा
है।
जरूरी सामान सितंबर तक पहुंचाना बेहद जरूरी
अक्तूबर से नीती और माणा घाटी बर्फ से ढक जाती है। ऐसे में सीमा पर डटे सैनिकों के लिए रसद और जरूरी सामान सितंबर तक पहुंचाना बेहद जरूरी है। आपदा से बदरीनाथ हाईवे, जोशीमठ-मलारी-नीती और जोशीमठ-सुमना-लपथल मोटर मार्ग बंद पडे़ हैं।
हालांकि जोशीमठ-नीती मोटर मार्ग पर भापकुंड में बीआरओ ने वाहनों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक व्यवस्था कर दी है, लेकिन बदरीनाथ हाईवे और लपथल मोटर मार्ग अभी भी बंद हैं।
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आईटीबीपी के कमांडेंट प्रवीण कुमार तिवारी का कहना है कि जवानों ने स्वयं ही सुमना-लपथल मोटर मार्ग के ध्वस्त हुए पुश्तों का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। जवान सुमना में क्षतिग्रस्त पैदल पुलिया का निर्माण कार्य भी करेंगे।
प्रतिदिन मौसम खराब रहने से सेना के हेलीकॉप्टर भी जोशीमठ से उड़ान नहीं भर पा रहे हैं, जिससे आईटीबीपी के जवान जरूरी सामान कंधों में लादकर सीमा क्षेत्र में ले जा रहे हैं। हमने बदरीनाथ हाईवे को खोलने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया है। मशीनें हाईवे को खोलने में लगी हुई हैं। शीघ्र सीमा क्षेत्र की सड़कों को खोल दिया जाएगा।
- कर्नल निलेश चंदाराना, कमांडर, बीआरओ, जोशीमठ
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