कहते हैं ना कि दिल की हसरत आखिर जुबां तक आ ही जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ जब मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल कृषि मंत्री डा. हरक सिंह रावत की जुबान से दिल की बात निकल ही गई। भले ही वे अधिकारियों के कामकाज करने के तरीकों पर बोल रहे थे।
अधिकारियों की बैठक में बोल बैठे
जिला सभागार रूद्रप्रयाग में अधिकारियों की बैठक में काबीना मंत्री उन्हें कामकाज में तेजी लाने के निर्देश दे रहे थे। हाल में बैठे एक विभाग के युवा सहायक अभियंता द्वारा अधिशासी अभियंता का प्रभार संभालने पर उन्होंने पूछा कि नौकरी को कितने साल हो गए हैं।
मंत्री का सवाल सुनकर अभियंता ने जवाब दिया कि सात साल और प्रभारी ईई के रुप में कुछ ही वक्त हुआ है।
इस जवाब पर काबीना मंत्री तपाक से बोल पड़े कि आप तो युवा हो। नई जिम्मेदारी भी मिली है। यहां तो मैं 27 साल से विधायक हूं, लेकिन रहा मंत्री का मंत्री। यदि एक दिन के लिए मैं सीएम बन जाऊं, तो काफी कुछ बदल देता।
बाद में किया डैमेज कंट्रोल
हालांकि बाद में रावत को एहसास हो गया कि उन्होंने क्या कह दिया है तो बात को सम्भालते हुए उन्होंने कहा कि वे तो बस उदाहरण दे रहे थे।