यमुनोत्री क्षेत्र में गुलदार पालतू पशुओं के काल बने हुए हैं। दो गुलदारों ने एक ही दिन अलग-अलग क्षेत्रों से 55 भेड़-बकरी और आठ भैंसों को मार गिराया।
खौफजदा पशुपालकों ने वन विभाग से दोनों खूनी गुलदारों से निजात दिलाने के अलावा मारे गए पशुओं के एवज में मुआवजे की मांग की है।
ग्रामीण दो गुलदारों द्वारा एक दिन में इतनी बड़ी संख्या में पशुओं की हत्या को असामान्य बता रहे हैं लेकिन पशु विशेषज्ञों की राय में यह सामान्य बात है।
एक ही दिन में इतने शिकार
रविवार को बसराली गांव के अजयपाल सिंह, यशवंत, जसवीर सिंह की भेड़-बकरियां यमुनोत्री क्षेत्र के भिंडियालीगाड़ के समीप चरने गई थी।
इसी दौरान गुलदार ने हमला कर 40 भेड़ और 15 बकरियों को अपना निवाला बना डाला।
इसी दिन हनुमानचट्टी के पास गुलदार ने गूजरों की आठ भैंसों को निवाला बनाया। पीड़ित पशुपालकों ने वन विभाग से मुआवजे की मांग की है।
'यह गुलदार की फितरत है'
वन क्षेत्राधिकारी किशोरी लाल ने बताया कि मामले की पड़ताल की जा रही है। जल्द रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजकर पीड़ितों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
जब भी गुलदार एक साथ इतनी बड़ी मवेशियों की भीड़ के बीच या बाड़े में घुसता है तो उसकी प्रवृत्ति होती है कि वह एक के बाद एक जानवरों को शिकार बनाता है। अगर एक जानवर को दबोचा और दूसरा भाग रहा है तो उसे दबोच लेगा। फिर तीसरे भागते हुए को दबोचेगा। यह उसकी फितरत है, इसे पागलपन या नरभक्षी नहीं कहा जा सकता।
- डॉ. वाइके झाला, वरिष्ठ वैज्ञानिक एंव बाघ विशेषज्ञ, भारतीय वन्य जीव संस्थान