एक अप्रैल से ईंट निर्माता फर्मों और ट्रेडर्स के लिए जीएसटी की नई व्यवस्था लागू की गई है। राज्य कर विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक ईंट निर्माता फर्मों के लिए समाधान योजना समाप्त कर दी गई।
प्रदेश में ईंट बनाने वाली फर्मों के लिए जीएसटी में समाधान योजना समाप्त की गई है। अब ईंट निर्माता फर्मों और ट्रेडर्स को पांच प्रतिशत के बजाय 12 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। यह व्यवस्था एक अप्रैल से लागू हो गई है। इस संबंध में राज्य कर विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गई।
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जीएसटी काउंसिल की ओर से लिए गए निर्णय के बाद प्रदेश सरकार ने भी ईंट कारोबार के लिए टैक्स की नई व्यवस्था लागू कर दी है। राज्य कर विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक ईंट निर्माता फर्मों के लिए समाधान योजना समाप्त कर दी गई। जिसमें 75 लाख तक के टर्न ओवर पर एक प्रतिशत टैक्स लिया जाता था लेकिन ईंट का कारोबार करने वाले ट्रेडर्स को समाधान योजना की सुविधा रहेगी। जिनका सालाना टर्न ओवर 75 लाख तक है।
अभी तक ईंट के कारोबार पर पांच प्रतिशत जीएसटी की दर तय थी। जिसे बढ़ाकर 12 प्रतिशत किया गया है। एक अप्रैल से ईंट कारोबार पर 12 प्रतिशत जीएसटी देना होगा। ईंट निर्माता फर्म दो तरह से जीएसटी जमा कर सकते हैं। 12 प्रतिशत के हिसाब से जीएसटी देने वालों को इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का लाभ मिलेगा, लेकिन छह प्रतिशत जीएसटी देने वालों को आईटीसी का लाभ नहीं मिलेगा।
अपर आयुक्त विपिन चंद्र ने बताया कि एक अप्रैल से ईंट निर्माता फर्मों और ट्रेडर्स के लिए जीएसटी की नई व्यवस्था लागू की गई है। 31 मार्च 2022 तक समाधान योजना का लाभ ले रहे ईंट निर्माता फर्मों को सीएमपी-3 फार्म भर कर पोर्टल पर अपलोड करना होगा।