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यूरोप से 'गायब' हुई चिड़िया देहरादून में मिली

Mon, 17 Feb 2014 06:21 PM IST
अाफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
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यूरोप में विलुप्त प्राय चिड़ियों की सूची में शामिल ‘ग्रेट बिटर्न’ ने इस साल आसन कंजर्वेशन रिजर्व में दस्तक दी है।
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मध्य एशिया और यूरोप में पाई जाने वाली ‘ग्रेट बिटर्न’ यूरोप की रेड लिस्ट में शामिल है। दुनिया से खात्मे के कगार पर पहुंच चुकी चिड़िया के दून में आने से वन्य जीव विशेषज्ञ और पक्षी प्रेमी खासे उत्साहित हैं।

पश्चिमी भारत के महाराष्ट्र आदि राज्यों में देखी गई थी

वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर शुभरंजन सेन, मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव डॉ. धनंजय मोहन, नेचर साइंस इनिशिएटिव के डॉ. रमन कुमार, तितली ट्रस्ट के संजय सोंधी और वन्य जीव शोधकर्ता सुनीति भूषण दत्ता ने 26 जनवरी को आसन बैराज पर बर्ड काउंटिंग की थी।

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डॉ. धनंजय ने बताया कि पहली बार यूरोप और मध्य एशिया के देशों में पाई जाने वाली ग्रेट बिटर्न चिड़िया यहां देखी गई है। इससे पहले यह केवल पश्चिमी भारत के महाराष्ट्र आदि राज्यों में देखी गई थी।

देहरादून तक इसका आना सुखद अहसास

यह चिड़िया यूरोप व मध्य एशिया में ब्रीडिंग के बाद वहां बर्फ पड़ जाने पर दिसंबर और जनवरी माह में भारत का रुख करती है। देहरादून तक इसका आना सुखद अहसास है।

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इसके अलावा 2008 के बाद ‘गोल्डन आई’ चिड़िया भी यहां पहुंची है। देखने में बेहद खूबसूरत गोल्डन आई तैरना पसंद करती है। इस चिड़िया का दून लौटना भी एक अच्छा संकेत माना जा रहा है।
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19वीं शताब्दी में खत्म हो गई थी बिटर्न

आमतौर पर यह चिड़िया अपने निवास स्थल पर बर्फबारी होने और पानी जम जाने की वजह से वहां से प्रस्थान करती है। आयरलैंड में 19वीं शताब्दी में सभी ग्रेट बिटर्न मर गई थी। इसके बाद वर्ष 2011 में वहां एक बिटर्न मिल पाई।

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दूसरी जगहों पर बिटर्न रेड लिस्ट में शामिल की गई है। इसकी खासियत यह है कि यह पानी के किनारे सरकंडों में मछली तलाशती है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके सेंसर बहुत तेज होते हैं, जिस वजह से खतरा भांपते ही यह तुरंत खामोश हो जाती है।

सुर्खाब की संख्या घटी
इस साल सुर्खाब की संख्या में कमी आई है। गत वर्ष इनकी संख्या 1518 थी, लेकिन इस साल काउंटिंग में आंकड़ा 867 तक ही पहुंच पाया। हालांकि, कुल पक्षियों की संख्या बढ़ी है। पिछले साल 3955 के मुकाबले इस साल वाटर बर्ड्स की संख्या 4566 रही।
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