उत्तराखंड के कोटद्वार में अजीब वाकया घटा है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीरचंद्र सिंह गढ़वाली के नाम पर चल रही ऋण योजना का लाभ उनके पोते को ही नहीं मिल पा रहा। इसके पीछे उनकी पहचान को कारण बताया जा रहा है।
वीरचंद्र सिंह गढ़वाली के कनिष्ठ पौत्र देशबंधु गढ़वाली को ही वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना के तहत ऋण नहीं मिल रहा है।
मंत्री को भेजा शिकायती पत्र
लोन न मिलने से परेशान देशबंधु ने भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी है। देशबंधु के आवेदन को यह कहकर दुग्ध उत्पादन समिति देवी मंदिर कोटद्वार की ओर से निरस्त कर दिया गया है कि वह उत्तराखंड का निवासी नहीं है।
इस बात की शिकायत देशबंधु ने दुग्ध विकास मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल से कर दी है, लेकिन मामला अभी भी उलझा हुआ है। साथ ही जिलाधिकारी को भी शिकायती पत्र देशबंधु की ओर से भेजा गया है।
20 सितंबर से हड़ताल
लोन के मामले में हुई कार्रवाई के विरोध में गढ़वाली का कहना है कि उसके पास उत्तराखंड में निवास के सारे कागजात मौजूद हैं, लेकिन फिर भी उसको योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है।
देशबंधु का कहना है कि वह यहां बरसों से निवास कर रहा है। उसके बावजूद भी उसके साथ भेदभाव किया जा रहा है। देशबंधु ने लोन न मिलने की दशा में 20 सितंबर से तहसील कार्यालय में भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी है।
मामले की होगी पड़ताल
दूसरी ओर इस मसले पर जिला दुग्ध संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह गुसाईं का कहना है कि वह मामले की पूरी पड़ताल कर समस्या के समाधान करने की कोशिस करेंगे।
अब आप ही तय कीजिए कि असली माजरा क्या होगा, दादा के नाम पर राज्य सरकार योजनाएं संचालित कर रही है और पोता अपनी पहचान के लिए भूख हड़ताल पर बैठने जा रहा है।