उत्तराखंड की राजनीति की तरह ही अभी तक राज्यपाल का कार्यकाल भी खंडित ही रहा है। डॉ. अजीज कुरैशी से पूर्व के चारों राज्यपाल अपना तय पांच साल का कार्यकाल पूरा नहीं करके गए हैं।
हालांकि अभी तक हुए पांच राज्यपालों ने उत्तराखंड को देश में अलग पहचान भी दी है। देश अन्य राज्यों से इतर इस छोटे नए राज्य ने सर्वधर्म सम्भाव की मिसाल पेश की है और यहां का राजभवन उसका गवाह बना है।
यहां बारी-बारी सिख, हिंदु, इसाई और मुस्लिम राज्यपाल रहे हैं। चौदह साल के उत्तराखंड को अब तक पांच राज्यपाल मिल चुके हैं।