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सरकार के लिए आफत बने कारिंदे

Mon, 11 Nov 2013 12:14 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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कर्मचारियों की मांगों को लेकर अब प्रदेश सरकार मुश्किल में है। एक तरफ वित्तीय समीकरण गड़बड़ाने के आसार हैं तो दूसरी तरफ वेतन विसंगतियों का निस्तारण न होने पर कर्मचारियों के और अधिक नाराज होने का डर है।
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खर्च बढ़ता जा रहा
वित्तीय स्थिति को पटरी पर रखने के लिए सरकार को कर्मचारियों के पेंशन, वेतन और भत्तों को एक सीमा के अंदर ही रखना होता है। यह खर्च बढ़ता जा रहा है। इस समय करीब 11 हजार करोड़ रुपये कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन पर खर्च हो रहे हैं जबकि प्रदेश की वार्षिक योजना ही दस हजार करोड़ रुपये से कम की है। संविदा कर्मियों को नियमित और नई नियुक्तियों की घोषणा कर प्रदेश सरकार पहले ही खर्च को बढ़ा चुकी है।

300 करोड़ का बोझ बढ़ेगा
राज्य कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों का निस्तारण होना है। वित्त विभाग के मुताबिक राज्य कर्मचारियों की वेतन संबंधित मांगों को जस का तस मान लिया गया तो करीब 300 करोड़ रुपये का बोझ बढ़ जाएगा। इसके अलावा कलेक्ट्रेट कर्मचारी कलेक्ट्रेट में अतिरिक्त पद सृजित करने की मांग कर रहे हैं। राजस्व पटवारियों की मांग वेतन, भत्तों को बढ़ाने और स्टेनोग्राफर एसोसिएशन पदोन्नति के रास्तों को खोलने की मांग कर रही है।
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केंद्र सरकार सातवें वेतन आयोग की घोषणा कर चुकी है। यह आयोग भी इस खर्च को बढ़ाने वाला साबित होगा।
वर्ष 2008 में छठे वेतन आयोग की संस्तुतियों को लागू करने के साथ ही प्रदेश में कर्मचारियों के पेंशन, वेतन और भत्तों पर खर्च करीब तीन गुना हो गया था। ऐसे में बजट को सरप्लस बनाए रखने के लिए सरकार को प्लान के खर्च में कमी भी करनी पड़ी।

संगठनों के हौसले बुलंद
अब फिर से यही स्थिति हैं। मुसीबत यह है कि कर्मचारियों की मांगों को दरकिनार किया जाता है तो सरकार को हड़ताल का सामना करना पड़ रहा है। दो हड़तालों से सरकार बैकफुट पर आई है और इससे भी अन्य संगठनों के हौसले बुलंद हैं।
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