राजधानी देहरादून की सियासत और नौकरशाही के ये किस्से आपके सामने इनकी पोल खोलकर रख देंगे।
ब्रीफकेस वाले विधायक जी
विपक्ष के एक विधायक जी कुमाऊं से देहरादून आते हैं तो उनका ब्रीफकेस समस्याओं और मांगों से भरा होता है और डाकिये की तरह उसे सीएम के सामने उडे़लकर चले जाते हैं।
एक ओर उनकी पार्टी में इस बात पर हंगामा बरपा है कि विपक्षी विधायकों की सुनी नहीं जा रही है और दूसरी ओर विधायक जी को इस बात की महारत है कि सीएम के पास जाकर ब्रीफकेस से कागजों का पुलिंदा निकालकर सीएम की चिड़िया (हस्ताक्षर) बैठवा लेते हैं।
जिस समय विधायक जी सीएम से हस्ताक्षर करवा रहे थे किसी ने टोका अरे विधायक जी बाहर तो आप कहते हैं कि सीएम सुनते हैं। बोले, हमारा काम इलाके के लोगों की समस्याओं को यहां तक पहुंचाना है मैं कर रहा हूं। अब काम हो या न हो।
बंद हो तो खटखटाएं नहीं
भाजपा के एक पदाधिकारी किसी मल्टीनेशनल कंपनी के सीईओ सरीखे नजर आते हैं। वैसे तो पार्टी ने इन्हें संगठन की मजबूती का काम दे रखा है लेकिन नहीं चाहते कि कार्यकर्ता डिस्टर्ब करें लिहाजा दरवाजे पर लिखवा दिया है कि दरवाजा बंद हो तो खटखटाए नहीं।
इनकी फितरत और आदतों से पार्टी में इन्हें बहेलिया कहा जाने लगा है। शौकीन बहुत हैं दाना डालकर जाल बिछा देता है और बेचारे पक्षी का फंसना तय है। एक बार तो दफ्तर को कॉल सेंटर में बदल डाला। एक महिला को फोन पर बैठा दिया। महिला बड़े नेताओं को फोन करके सदस्यता का ब्यौरा मांगने लगी।
जिस पर कुमाऊं के एक बड़े नेता ने फटकार लगाई। विरोध शुरू हुआ तो महिला को हटाना पड़ा। नेताजी जी की खूबी है राजनीति में महिलाओं को आगे लाने की वकालत करते हैं।
आबकारी के खाते-पीते अधिकारी
कहते हैं पुरुष का थोड़ा पेट बाहर निकलना संपन्नता की निशानी है, लेकिन जरूरत से अधिक निकल आए तो लोग पता नहीं क्यों उसे बेईमानी मानते हैं। विधानसभा सत्र के दौरान आबकारी विभाग की प्लेट लगी गाड़ी से एक साहब उतरे उनके पीछे चार वर्दीधारी भी थे।
उतरते ही सबकी निगाह उनके बड़े भारी पेट पर जा टिकी। कोई बोला आखिर खाता क्या है, किसी ने कहा खाता नहीं लोग पीते हैं तो इसका पेट फूलता। उनका महकमा और वर्दीधारियों को देखकर कोई बोला कि बिना एफएल-2 के जब इतना फूला है तो आगे क्या होगा।
हुजूर का वन मैन शो
सरकार के दरबार में हुजूर से उनके दस रत्न परेशान दिख रहे हैं। हुजूर चाहते हैं रन भी वही बनाएं और सभी विकेट भी उनके खाते में जाएं। लिहाजा दरबार के दस रत्न आगे की कुर्सियों में बैठ तमाशबीन से दिखते हैं। विपक्षी खेमे के सवालों का जवाब रत्नों को देना होता है, लेकिन हुजूर क्लास के उस तेज बच्चे की तरह हैं जो हर सवाल पर अंगुली उठाकर खुद जवाब देना चाहते हैं।
रत्नों पर आरोप लग रहा है वे परीक्षा के लिए तैयार होकर नहीं आते लेकिन हुजूर की अंगुली उठते ही उन्हें बैठना पड़ता है। आलोचक उनके रत्नों को नाकाबिल, नकारा और निकम्मा साबित करने में जुटे हैं और पार्टी में भी उनकी छवि नहीं बन रही है। एक रत्न का कहना है कि हुजूर की वनमैन शो की पुरानी आदत का असर भी है और सियासत भी।