चमोली जनपद के घूनी गांव में बृहस्पतिवार को हुई दिल दहला देने वाली घटना से जहां पूरा क्षेत्र सदमे में है, वहीं, गांव की 70 वर्षीय तुलड़ी देवी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। अपने जवान बेटे, बहू और मायूम पोते-पोतियों की मौत के बाद से बुजुर्ग तुलड़ी देवी के आंखों से आंसुओं का सैलाब थमने का नाम नहीं ले रहा है।
घूनी गांव में भी बृहस्पतिवार को दिनभर मातम पसरा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में इस प्रकार की घटना पहले कभी देखने को नहीं मिली। घाट विकास खंड के दूरस्थ घूनी गांव में मौजूदा समय में करीब 415 परिवार निवास करते हैं, जिनमें से 90 परिवार अनुसूचित जाति के हैं। तुलड़ी देवी का बड़ा बेटा राजेंद्र लाल अस्वस्थ होने के कारण वर्ष 1999 में इलाज के दौरन मर गया था। तब से तुलड़ी देवी छोटे बेटे दिनेश के सहारे अपना जीवन यापन कर रही थी।
तुलड़ी देवी अपने पुराने मकान में निवास करती थीं, जबकि दिनेश का परिवार इन दिनों ठंड बढ़ने के कारण गौशाला वाले घर में रहता था। तुलड़ी देवी को भी घटना की जानकारी बृहस्पतिवार सुबह मिली। घटना के बाद से गांव में मातम पसरा हुआ है। मृतक दिनेश की बहन कुंवरी देवी भी गांव के ही आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यरत है। ग्राम प्रधान लखपत सिंह का कहना है कि क्षेत्र में इस तरह की यह पहली घटना है। इस दिल दहला देने वाली घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है।
घटना की जांच शुरू...
विकास खंड के घूनी गांव के एक घर में तीन बच्चों सहित पति-पत्नी रहस्यमय हालात में मृत मिले थे। गृहस्वामी पूर्व में पीआरडी में तैनात था। ग्राम प्रधान की सूचना पर तहसील प्रशासन ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतकों का विसरा सुरक्षित रखा गया है। फिलहाल, खबर लिखे जाने तक घटना के कारणों का कोई पता नहीं चल पाया है। राजस्व विभाग ने घटना की जांच शुरू कर दी है।
ग्राम प्रधान लखपत सिंह ने बताया कि बृहस्पतिवार को सुबह जब काफी देर तक दिनेश लाल की गौशाला नहीं खुली तो पड़ोस में रहने वाला महेंद्र लाल उनके घर पहुंचा। महेंद्र ने जैसे ही घर का दरवाजा खोला तो वहां दिनेश की पत्नी वीरा देवी (35), पुत्री नेहा (13), पुत्र अरुण (8) और अक्षय (7) निर्जीव जैसे पड़े थे। महेंद्र ने दिनेश (38) की खोजबीन शुरू की तो वह दूसरे घर के कमरे में पंखे पर रस्सी के सहारे लटका मिला।