पुरातात्विक महत्व की धरोहरों की सूरत बदलने का ऐलान आम बजट में किया गया था, लेकिन दून सर्किल में इससे किस-किस धरोहर को लाभ मिल सकता है, इसका खुलासा नहीं था।
सोमवार को तस्वीर साफ हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे ज्यादा जोर धरोहरों के आस-पास से अतिक्रमणकारियों को खदेड़ना है, लिहाजा इनके इर्द-गिर्द सुरक्षा दीवार खींचने का कार्य प्रमुखता से किया जाएगा।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के दून सर्किल को इसके लिए साढ़े 3 करोड़ रुपए मिले हैं।
इन धरोहरों की बदलेगी सूरत
इस कदम से 70 के दशक में उत्खनित साइट वीरभद्र (देहरादून), गोविषाणा टीला काशीपुर (उधम सिंह नगर), जगतग्राम, पुरोला (उत्तरकाशी) की सूरत बदल सकती है।
इसके अलावा संरक्षण कार्यों के लिए भी प्रस्ताव मांगे गए हैं। जागेश्वर (कुमाऊं), लाखामंडल (गढ़वाल) समेत कई धरोहरों के लिए चलाए जा रहे संरक्षण कार्यों को इसका फायदा पहुंचेगा।
दून सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद् से इस संबंध में सितंबर माह तक प्रस्ताव देने को कहा गया है।
अतिक्रमण ढहाने के थे निर्देश, लेकिन कार्रवाई नहीं
द्वाराहाट में छह, बैजनाथ में तीन, काशीपुर में पांच धरोहरों के इर्द-गिर्द अतिक्रमण था, जिन्हें हटाने के निर्देश दिए गए थे।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के दून सर्किल से सितंबर तक प्रस्ताव तो मांगा गया है, लेकिन जानकारों की मानें तो इतनी जल्दी स्मारकों की स्थिति का जायजा और चिन्हीकरण टेढ़ी खीर होगा।
दून सर्किल के चार सब-सर्किल और उनके तहत जिले
देहरादून- छह स्मारक, पुरास्थल
उत्तरकाशी- 1 पुरास्थल
चमोली- छह स्मारक
हरिद्वार- 1 स्मारक
अल्मोड़ा- 18 स्मारक
बागेश्वर- 2 स्मारक
चंपावत- 3 स्मारक
पिथौरागढ़- 2 स्मारक
नैनीताल- 2 स्मारक
उधम सिंह नगर- 1 पुरास्थल