गंगोत्री ग्लेशियर का मुहाना गोमुख जिस गति से दरक रहा है, उससे लगता है कि दो साल बाद यहां से उच्च हिमालयी ट्रेकिंग और पर्वतारोहण का रास्ता बंद हो जाएगा।
ट्रेकिंग-पर्वतारोहण के जानकार भी इस बात को स्वीकार रहे हैं।
ऐसे में ग्लेशियर को संरक्षित रखते हुए ट्रेकिंग एवं पर्वतारोहण जारी रखने के लिए भोजवासा से गंगा भागीरथी को पार कर दूसरे छोर से ट्रेक शुरू करने की मांग जोर पकड़ने लगी है।
मौसम में बदलाव गंगोत्री के लिए खतरनाक
बीते कुछ सालों से मौसम में आ रहे बदलाव गंगा के उद्गम गंगोत्री ग्लेशियर पर भारी पड़ रहे हैं।
ग्लेशियर का मुहाना गोमुख क्षतिग्रस्त हो गया है। बीते साल गोमुख में करीब चालीस मीटर गहरी खाई उभरने से ग्लेशियर दो फाड़ हो गया है।
इससे आगे तपोवन, नंदनवन की ओर जाने वाले पर्यटक जोखिम के साथ आवाजाही करने को मजबूर हैं।
इस सीजन में गोमुख से आगे उच्च हिमालयी ट्रेकिंग एवं पर्वतारोहण कर लौटे पर्यटक एवं पर्वतारोही भी मानते हैं कि जिस रफ्तार से ग्लेशियर टूट रहा है, उससे दो साल बाद यहां से आगे आवाजाही बंद होना तय है।
भागीरथी के दूसरे छोर से ट्रेक चालू करने की मांग
इसे उच्च हिमालयी ट्रेकिंग एवं पर्वतारोहण के लिए खतरा मानते हुए इस व्यवसाय से जुड़े लोग अब भोजवासा से नदी पार कर भागीरथी के दूसरे छोर से ट्रेक चालू करने की मांग कर रहे हैं।
उनका कहना है कि दूसरी ओर से आवाजाही से ग्लेशियर को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचेगा।
बीते कई सालों से गोमुख तपोवन क्षेत्र में ट्रेकिंग पर आ रहा हूं, लेकिन इस बार गोमुख बुरी तरह टूटा हुआ है। ग्लेशियर पर उभरे क्रेवास को पार कर जोखिम के साथ आवाजाही करना पड़ रहा है।
- राघवेंद्र रॉडी, ट्रेकर निवासी बंगलूरू
इस व्यवसाय से चल रही सैकड़ों लोगों की आजीविका
ग्लेशियर को नुकसान ट्रेकिंग एवं पर्वतारोहण की वजह से नहीं, बल्कि मौसम में आ रहे बदलाव से पहुंच रहा है।
इस व्यवसाय पर सैकड़ों लोगों की आजीविका टिकी है। वन विभाग यदि भोजवासा में पुल तैयार कर नदी के दूसरे छोर से ट्रेक खोल दे, तो न सिर्फ ट्रेकिंग एवं पर्वतारोहण जारी रहेगा। बल्कि ग्लेशियर को भी किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचेगा।
- मान सिंह पंवार, ट्रेकिंग व्यवसायी