देहरादून के पलटन बाजार के एक दुपट्टा हाउस की तीसरी मंजिल पर बने गोदाम में बुधवार शाम आग लग गई।
तेज लपटों और धुएं से बाजार में अफरातफरी मच गई। दमकल कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। गोदाम में लाखों के नुकसान का अनुमान है।
जेनरेटर से निकली चिंगारी से गोदाम खाक
पलटन बाजार में कोतवाली के पास अशोक कुमार का कुक्कू दुपट्टा हाउस नाम से प्रतिष्ठान है। तीन मंजिला इमारत की सबसे ऊपरी मंजिल में गोदाम बनाया गया था।
इसके बगल में जेनरेटर रखा था। शाम चार बजे बिजली जाने के बाद जेनरेटर चलाया गया था। सवा चार बजे अचानक जेनरेटर से निकली चिंगारी से गोदाम में रखे दुपट्टों ने आग पकड़ ली।
इस दौरान दुकान के ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर में र्कई ग्राहक मौजूद थे। आग की लपटें बढ़ीं तो सभी जान बचाकर बाहर भागे। इस दौरान आसपास की दुकानें खाली हो गईं, जिससे सड़क पर भीड़ जुट गई।
सूचना पर कोतवाली निरीक्षक एसएस बिष्ट फायर कर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। भीड़ को हटाने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। चार दमकल वाहनों ने एक साथ पानी की बौछारें कीं, तब जाकर आग पर काबू पाया जा सका।
इस दौरान गोदाम में आग बुझाने के लिए डाला गया पानी पहली मंजिल पर बनी दुकान में घुस गया। इससे वहां रखा सामान खराब हो गया। बाद में व्यापारियों ने दुकान में रखा सामान बाहर निकाल लिया।
अग्निशमन अधिकारी शिव प्रसाद ममगई ने बताया कि जेनरेटर से निकली चिंगारी से आग लगी है।
24 घंटे में आग की दूसरी घटना
राजधानी में 24 घंटे में आग की दूसरी घटना है। मंगलवार को करनपुर में एक कांप्लेक्स की दुकान में आग और सिलेंडर फटने से लाखों की संपत्ति जल गई थी।
कमजोर बिल्डिंग ने बढ़ाई दिक्कत
जिस बिल्डिंग में दुपट्टे की दुकान है, वह काफी पुरानी और कमजोर बताई जा रही है। ऐेसे में आग बुझाने के दौरान फायर कर्मियों को खासी परेशानी हुई।
सबसे बड़ा सवाल यह था कि पानी कहां से डाला जाए। दमकल ने पहले दीवार तोड़ने की योजना बनाई, लेकिन इससे सभी दीवारें ढह जाने और आसपास की दुकानों को खतरा था।
आखिर तीसरी मंजिल पर बनी दो खिड़कियों को तोड़कर पानी डाला गया।
दुकानों में नहीं सुरक्षा इंतजाम
बाजार में बनी दुकानों में व्यापारी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं रखते हैं। आलम यह है कि भवन तो दो से तीन मंजिल तक बनवा लिए गए हैं, लेकिन ऊपर चढ़ने के लिए सीढ़ियां संकरी हैं।
जिस दुकान में हादसा हुआ, वहां भी निचली दोनों मंजिलों में सीढ़ियों पर सामान इस कदर ठूंसा गया था कि दमकल कर्मी ऊपर नहीं जा सके। जबकि जेनरेटर सबसे ऊपर की मंजिल पर था।
सूत्र बताते हैं कि बाजार में अग्निशमन विभाग सुरक्षा मानकों की जांच के लिए अभियान चलाए तो अधिकतर दुकानों का यही हाल मिलेगा।
बिजली के तार बन सकते हैं खतरा
बाजार में बिजली के बेतरतीब तार हादसों का सबब बन सकते हैं। यहां एक-एक खंभे पर 15-20 दुकानों के कनेक्शन के लिए केबल बांधी गई हैं। इससे खंभों पर तारों का जाल दिखता है।
इसके अलावा खंभों और तारों की दुकानों से सुरक्षित दूरी का भी कोई ख्याल नहीं रखा गया है। ऐसे में कभी शार्ट सर्किट होने पर बड़ा अग्निकांड हो सकता है।
...तो बेहतर था वाहनों पर प्रतिबंध
राजधानी पुलिस ने करीब एक वर्ष पूर्व पलटन बाजार में दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया था। इससे अतिक्रमण और अवैध पार्किंग के चलते 15 फीट तक सिकुड़ चुकी सड़क दोगुनी चौड़ी हो गई थी।
पुलिस ने बाजार में लोगों के बैठने के लिए कुर्सियां लगवाई थीं। सड़क खुल जाने से भीड़ अधिक आने लगी थी, लेकिन आवाजाही में किसी को परेशानी नहीं होती थी। आपात स्थिति में एंबुलेंस या दमकल वाहनों के प्रवेश में आसानी होती थी।
लेकिन, कुछ व्यापारियों ने विरोध के बाद इस व्यवस्था को बंद कर दिया गया। इसके बाद फिर दुकानों के आगे सड़क पर अतिक्रमण बढ़ गया है।
हालांकि हाईकोर्ट का आदेश है कि फुटपाथों से अवैध कब्जे हटाएं जाएं लेकिन इस संबंध में जिला प्रशासन कार्रवाई करने से बचता है।
अवैध निर्माणों की बाढ़
सूत्रों की मानें तो बाजार में कई दुकानों में अवैध निर्माण किया गया है। व्यापारी भवन की छतों पर एक के बाद एक मंजिल बना लेते हैं।
कार्रवाई से बचने के लिए यह निर्माण आधा कच्चा छोड़ दिया जाता है। ऐसे में आग लगने या किसी अन्य हादसे के दौरान ढहने के डर से इन निर्माणों को छेड़ना भी मुश्किल हो जाता है।