डॉ. प्रिया नारायण ने इंपेक्ट ऑफ क्लाइमेट चेंज इन इंडिया पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पर्यावरण में बदलाव किसी खास राज्य की बात नहीं है, यह सब अब पूरे भारत के जलवायु परिवर्तन में दिख रहा है। डॉ. हामान उनुसा ने कहा कि पर्यावरण में बदलाव और आपदा का असर कृषि भूमि पर सबसे अधिक हो रहा है। अब यह कृषि भूमि का मुद्दा दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुका है। कृतिमान अवस्थी ने कहा कि पंचायत स्तर पर भी लोगों को कैपेसिटी बिल्डिंग और ट्रेनिंग की जरूरत है, जो आपदा के खतरे को कम कर सकता है।
डॉ. हरीश बहुगुणा ने लैंडस्लाइड और उसके होने वाले खतरों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं पूरे इको सिस्टम पर असर डालती हैं। डॉ. शालिनी ध्यानी ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हम देख सकते हैं की पहाड़ी क्षेत्रों में क्लाइमेट चेंज का असर बहुत तेजी से हो रहा है। यह ईको सिस्टम और बायोडायवर्सिटी के अध्ययन से ही पता चलता है कि इससे कितना नुकसान हो रहा है। हम देख सकते हैं कि पहाड़ों में कई तरह के जीव जंतु विलुप्त होने के कगार पर हैं। इसका एकमात्र कारण पर्यावरण में बदलाव ही है।