नामांकन के साथ ही तेज हुए प्रचार अभियान में सोशल नेटवर्किंग साइट्स के माध्यम से राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं।
कुछ ही प्रत्याशियों के सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर प्रोफाइल हैं, लेकिन उनके नाम से कुछ वेब माडरेटर सक्रिय हैं। वेब कम्यूनिटीज पर राजनीतिक विश्लेषण तेज हो गए हैं। हालांकि ऑनलाइन प्रचार को राज्य में उस तरह तरजीह नहीं मिल रही, जैसी राष्ट्रीय पटल के नेता करते हैं।
राजनीतिक दल भाजपा कांग्रेस के घोषणा पत्र से लेकर प्रत्याशी सूची और स्टार प्रचारकों के भाषण, ट्वीट और कमेंट्स उनकी वेबसाइट्स पर तुरंत डाले जा रहे हैं, लेकिन राज्य में दल इतने सक्रिय नहीं है।
रोचक कमेंट डाले जा रहे हैं
एक वेब पेज के माडरेटर राकेश गौड़ ने बताया कि हमारा टारगेट सिर्फ लोगों तक चुनाव की चल रही गतिविधियों से यूजर्स को अवगत करवाना है।
वहीं राजनीतिक दलों की वेबसाइट्स दिन में कई बार अपडेट हो रही हैं। सोशल नेटवर्किंग पर जहां नेताओं के अपने उनकी बड़ाई में लगे हैं वहीं यूजर्स नेताओं के कार्यप्रणाली को लेकर रोचक कमेंट डाले जा रहे हैं।
मुद्दों पर नहीं करता कोई ट्वीट
हंगामा मचा देने वाले ट्वीट उत्तराखंड के नेता नहीं करते हैं। उत्तराखंड में कोई नेता ऐसा नहीं है किसी भी मुद्दे पर ट्वीट करता है।
यहां नेताओं के दिए संबोधन पर फेसबुक पर राजनीतिक में इच्छा रखने वाले बहस जरूर छेड़ते हैं, लेकिन न तो राजनीतिक दल और न ही राजनेता सोशल मीडिया पर किसी ज्वलंत मुद्दे पर अपने विचार प्रकट करते हैं।