उत्तराखंड की धर्मनगरी ऋषिकेश में प्राविधिक शिक्षा विभाग खदरी श्यामपुर में लड़कियों के रहने के लिए एक करोड़ रुपये से हॉस्टल बना रहा है। जिस जगह हॉस्टल बन रहा है वह डूब क्षेत्र (हाई फ्लड जोन) है।
हर साल बाढ़ से आती है तबाही
बारिश के मौसम में यहां न केवल बाढ़ आती है बल्कि अच्छी-खासी तबाही मचाती है। यहां पहले पालीटेक्निक कॉलेज बनाया जा चुका है, जो अब हर साल बाढ़ से तबाह होता है।
इसके बावजूद वहां पर गर्ल्स हॉस्टल बनाने से पहले सुरक्षात्मक उपाय नहीं किए गए। सरकार, निर्माण एजेंसी और कॉलेज प्रशासन ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया।
वर्ष 2009-10 में पांच करोड़ की लागत से बना पालीटेक्निक कॉलेज साल 2011 से हर वर्ष बाढ़ के थपेड़े झेल रहा है। बरसात के दिनों में गंगा का जलस्तर बढ़ने पर पानी और मलबा कॉलेज के कैंपस में घुस जाता है।
इससे बीते तीन वर्षों से शिक्षण सत्र महीनों विलंब से शुरू हो रहा है। बीते वर्ष आपदा से कॉलेज के ग्राउंड फ्लोर में आधा फीट तक मलबा भरने से बिल्डिंग को क्षति हुई।
अब बाढ़ प्रभावित गंगा तटीय क्षेत्र में कॉलेज से सटी भूमि पर केंद्र सरकार की महिला समृद्धि योजना के तहत एक करोड़ की लागत से लड़कियों के लिए 33 शीटर छात्रावास बनाया जा रहा है। डूब क्षेत्र में दूसरी योजना बनाने से पहले इसके तकनीकी पहलुओं और बाढ़ सुरक्षा इंतजाम पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
बाढ़ से पालीटेक्निक को हुआ नुकसान
रेजिडेंशियल एरिया का बेस बाढ़ से भूकटाव के कारण बह गया। इसके बाद से बीम के सहारे दीवारें टिकी हैं। मुख्य बिल्डिंग में एक भवन का फर्श पांच फीट तक धंस गया है। कॉलेज की चहारदीवारी और दो गेट ध्वस्त हो चुके हैं।
केबल खराब होने की वजह से बिजली की आपूर्ति बंद है। कॉलेज कैंपस के 10 केवी के दो जेनरेटर सेट और 110 किलोवाट का ट्रांसफार्मर ध्वस्त हो गया है।
कैंपस की आंतरिक विद्युत आपूर्ति के लिए लगे पोल बह चुके हैं और लाइन डैमेज है। पेयजल आपूर्ति के लिए बना पंपहाउस क्षतिग्रस्त है। कर्मचारी हैंडपंप लगाकर पानी का इंतजाम कर रहे हैं।
दीवार से बाढ़ रोकने की तैयारी, प्रस्ताव लंबित
श्यामपुर में पालीटेक्निक कॉलेज की बाढ़ से सुरक्षा के लिए दीवार की योजना प्रस्तावित है। महीनों बाद भी शासन से वित्तीय मंजूरी नहीं मिली है।
प्रधानाचार्य डा. गौतम अग्रवाल ने बताया कि तीन साल से कैंपस में बाढ़ का पानी घुस रहा है। लिहाजा इससे सुरक्षा के लिए योजना प्रस्तावित है, जिसे मंजूरी नहीं मिल पाई है।