कूड़ा उठान के काम से दून वैली वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी के हाथ खींचने के पहले दिन ही देहरादून में कचरे का कहर नजर आया।
कंपनी प्रतिनिधियों की मान मनुहार में जुटे निगम अफसर
सड़कों, गलियों पर गंदगी का अंबार लगा रहा तो कालोनियों में खाली प्लाट कचरे से अट गए।
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महीनों से चल रहे विवाद पर चुप्पी साधे हुए निगम अफसर रविवार को कंपनी प्रतिनिधियों की मान मनुहार में जुटे रहे, लेकिन कंपनी ने निगम से करार जारी रखने से साफ इनकार कर दिया।
नगर निगम और कंपनी के बीच चल रहे विवाद से कुछ दिन से सफाई व्यवस्था बदहाल है। कंपनी ने कुछ समय पूर्व दिए नोटिस के अनुरूप एक मार्च से कूड़ा उठान बंद कर दिया। शनिवार को कंपनी ने निगम से मिले वाहन और रिक्शे भी लौटा दिए।
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रविवार को इसका असर भी नजर आया। कई वार्डों में डोर टू डोर कूड़ा उठान करने वाले वाहन और रिक्शे नहीं पहुंचे तो लोगों ने कचरा खाली प्लाटों में ही फेंक दिया। दूसरी ओर, सड़कों-गलियों में भी कूड़े के ढेर से लोगों का निकलना मुश्किल हो गया।
सड़कों पर गंदगी के ढेर
पटेलनगर, लाल पुल, हरिद्वार रोड, कांवली रोड, राजपुर, नेहरू कालोनी रिंग रोड, रेसकोर्स और अन्य कई क्षेत्रों में सड़कों पर गंदगी के ढेर पड़े रहे।
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नगर निगम ने अपने सफाई कर्मचारियों के जरिये राजा रोड, तहसील चौक, सब्जी मंडी, दून चौक समेत कुछ जगहों पर सफाई की, फिर भी कचरा पूरी तरह नहीं उठाया जा सका।
निगम के अधिकारियों ने दावा किया कि कंपनी के सफाईकर्मी फिलहाल नगर निगम के साथ काम कर रहे हैं। कंपनी से लौटाए गए गाड़ियों और रिक्शों से कूड़ा उठान किया जा रहा है।
अफसरों में अफरातफरी
शहर की सफाई व्यवस्था पर रविवार को निगम से लेकर प्रशासन और शासन तक अफसरों में अफरातफरी का माहौल रहा। जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने कंपनी के अधिकारियों से वार्ता कर सफाई व्यवस्था में सहयोग की अपील की।
इसके बाद शहरी विकास सचिव डीएस गर्ब्याल ने भी नगर निगम के अधिकारियों और कंपनी प्रतिनिधियों से गुजारिश की कि वे डोर टू डोर कूड़ा उठान का काम जारी रखें।
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वार्ता से समस्या सुलझाने की बात कही गई। दिल्ली में मौजूद कंपनी अधिकारियों से भी बात की गई, लेकिन कंपनी काम के लिए तैयार नहीं हुई।
विधायक ने अपनी सरकार को घेरा
बिगड़े हालात पर कांग्रेस विधायक राजकुमार ने अपनी ही सरकार पर सवाल उठाए हैं। मुख्यमंत्री हरीश रावत को भेजे ज्ञापन में विधायक ने कहा कि सरकार इस मसले पर ठोस कदम नहीं उठा रही है।
उन्होंने कंपनी प्रतिनिधियों से वक्त रहते वार्ता कर निर्णय न लेने के लिए नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया। कहा कि शहर से कूड़ेदान हटा दिए गए। कंपनी को डोर टू डोर कूड़ा उठान करना था, लेकिन कंपनी के कर्मचारी बड़े संस्थानों से ही कूड़ा उठाने में लगे रहे।