उत्तराखंड में खनन व्यवसाय के बाद अब डैमों में हो रहे मत्स्य पालन की मोटी कमाई पर कुमाऊं के साथ ही यूपी के दबंग ठेकेदारों की नजर है।
राजनीतिक संरक्षण और दबंगई के चलते वर्चस्व
राजनीतिक संरक्षण और दबंगई के चलते अपना वर्चस्व कायम करने में लगे लोग तराई की फिजां खराब करने में लगे हैं। जिले में इस वर्ष मार्च में दिनेशपुर थाना क्षेत्र में गैंगवार हो चुकी है।
मत्स्य पालन विभाग के अनुसार जिले में मत्स्य पालन से करीब 800 लोग प्रत्यक्ष तौर पर रोजगार से जुड़े हुए हैं। जबकि हजारों लोग भी मत्स्य पालन की बदौलत अपना गुजारा कर रहे हैं। करीब बीस हजार हेक्टेयर क्षेत्र में तुमड़िया, बौर, धौरा, बैगुल और नानकसागर जलाशय फैले हुए हैं। इनका ठेका विभाग कराता है।
इसके अलावा करीब दो सौ हेक्टेयर में 410 मत्स्य तालाब भी बने हुए हैं। इनसे वर्ष भर में करीब 100 टन मछली का उत्पादन होता है जिसका व्यवसाय करीब दस करोड़ रुपए होता है। इस मोटी कमाई को देखते हुए अब कुमाऊं के साथ ही यूपी के दबंग भी डैम के ठेके लेने की जुगत में लगे रहते हैं।
इसके लिए उन्हें जहां राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, वहीं उनके पास बाहुबलियों की भी कमी नहीं हैं। ऐसे में जिले के डैमों में पल रही मछली से होने वाली मोटी कमाई पर अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए वे कोई भी अपराध करने को तैयार रहते हैं। यही वजह है कि मार्च 2014 में इस व्यवसाय में अपना वर्चस्व कायम रखने के लिए दिनेशपुर थाना क्षेत्र में गैंगवार हो चुकी है।
ठेके को लेकर मार्च में हुई थी फायरिंग
मछली शिकार के ठेके को लेकर नौ मार्च 2014 की रात गुलरभोज स्थित झाले में तोड़फोड़ कई राउंड हवाई फायरिंग हो चुकी है। इस दौरान मारपीट में तीन महिलाओं समेत आठ मजदूर चोटिल हो गए थे।
प्रताप बिष्ट ने आगरा की ए एंड एस कंपनी के साथ पार्टनरशिप में गूलरभोज डैम सितंबर 2013 में उत्तराखंड मत्स्य विकास अभिकरण से 78.60 लाख रुपए में प्रति वर्ष के हिसाब से मछली शिकार का ठेका लिया था। लेकिन पूर्व ठेकेदार दबंगई के बल पर जलाशय से कब्जा नहीं छोड़ रहा था।
इसलिए अपना कब्जा लेने के लिए कंपनी ने कैनाल कालोनी के पास झाले बना लिए। इस पर नौ मार्च 2014 की रात पूर्व ठेकेदार के गुर्गों ने वहां पहुंचकर झाले तोड़ दिए और मारपीट करते हुए हवाई फायरिंग भी की। इस दौरान हरिशंकर, मरनिक चंद, विजय, राजेंद्र और छोटू सहित तीन मजदूर महिलाएं चोटिल हो गई थीं। इसके बाद कई दिनों तक मौके पर पीएसी तैनात रही थी।
दयाल शरण ने किए वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र
शक्तिफार्म मुख्य बाजार में पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष प्रताप बिष्ट की हत्या के मामले में फारेंसिक विभाग कुमाऊं एक्सपर्ट डॉ. दयाल शरण ने टीम के साथ विधि विज्ञान से संबंधित अन्य साक्ष्यों को एकत्रित किया और घटनास्थल से खून के नमूने व फिंगर प्रिंट लिए हैं। डॉ. शरण ने बताया कि घटनास्थल से बुलेट, खोखे और कारतूस भी मिले हैं।
डॉग स्क्वायड भी लगाया
सितारगंज। शक्तिफार्म हत्याकांड के खुलासे में पुलिस ने डॉग स्क्वायड को भी लगाया है। डॉग स्क्वायड की टीम ने घटनास्थल से गुरुग्राम की ओर जाने वाले बदमाशों की तलाश में कांबिंग की।