देहरादून जिले के सैकड़ों स्कूलों के छात्र साल भर ढह जाने के कगार पर जा पहुंची छतों के नीचे अक्षर बांचने पर मजबूर रहे। जर्जर भवनों की दरकती दीवारों के तले बच्चों के भविष्य पर खतरा मंडराता रहा।
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वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में निर्धन आवासविहीन परिवार तपती धूप, मूसलाधार बारिश और कड़ाके की ठंड में पालीथिन की छत तान सिकुड़े, सहमे गुजर करते रहे।
पैसा तो मिला पर नहीं हुआ खर्च
जिला योजना में ऐसे छात्रों और लोगों को छत मुहैया कराने की व्यवस्था भी की गई। ग्राम्य विकास विभाग योजना के तहत मिली 445 लाख रुपये की रकम से फरवरी तक सिर्फ छह फीसदी राशि ही खर्च कर सका। वहीं, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने 141 लाख में से महज 33 फीसदी राशि खर्च की। विकास कार्यों पर लापरवाही बरतने वाले ये दो ही विभाग नहीं हैं।
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सिंचाई, मत्स्य पालन, सूचना जैसे विभागों की लंबी फेहरिस्त है, जिन्होंने जिला योजना की रकम खर्च करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब वित्तीय वर्ष 2013-14 की समाप्ति पर राशि लैप्स होने की आशंका बढ़ गई है।
बस दो दिन और
सूत्र बताते हैं कि अब महज दो दिन में विभाग अधिक से अधिक रकम खर्च करने की कोशिश में हैं। ऐसे में करोड़ों की रकम या तो ठिकाने लगाई जाएगी या फिर ऐसे काम किए जाएंगे जिनकी गुणवत्ता बेहद घटिया होगी।
ये करते रहे इंतजार
जीजीआईसी राजपुर रोड, प्राथमिक विद्यालय बंजारावाला, पूर्व माध्यमिक विद्यालय राजपुर रोड भवन जर्जर हैं। इनके अलावा जिले में 100 से अधिक स्कूलों के भवन जीर्ण स्थिति में आ चुके हैं।
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दूसरी ओर, ग्राम्य विकास विभाग की लापरवाही ने जिले के सैकड़ों निर्धन आवासविहीन परिवारों के इंदिरा आवास योजना से लाभान्वित होने की मुराद पूरी नहीं की।
ये भी होने थे काम
ग्रामीण क्षेत्रों में नहरों, गूलों का निर्माण किया जाना था। आपदा के दौरान जिले के सैकड़ों गांवों में गूलें क्षतिग्रस्त होने से किसानों पर संकट बना हुआ है। इसी तरह आपदा ने दर्जनों सड़कों को नुकसान पहुंचाया है। अब भी जौनसार क्षेत्र की सड़कें क्षतिग्रस्त हैं।
आंकड़ों की कहानी
जिला योजना के तहत वर्ष 2013-14 के लिए कुल 74 करोड 61 लाख रुपये का परिव्यय अनुमोदित किया गया। शासन से अनुमोदित परिव्यय का 72 प्रतिशत यानी 54 करोड़ दस लाख रुपये विभिन्न विभागों को अवमुक्त किए गए।
विभिन्न विभाग फरवरी तक महज 39 करोड़ 71 लाख रुपये ही खर्च कर सके हैं। राज्य योजना का 84, केंद्र पोषित योजना का 72 और वाह्य सहायतित योजना का 95 प्रतिशत ही खर्च किया जा सका है।
विधायक निधि नहीं होगी लैप्स
वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक अपनी निधि खर्च न कर सके विधायकों को सरकार ने इस बार राहत दी है। चार मार्च को जारी आदेश में अपर आयुक्त ग्राम्य विकास रोशनलाल ने प्रदेश के समस्त मुख्य विकास अधिकारियों को विधायक निधि लैप्स न करने का निर्देश दिया है।
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उधर, राजधानी के 11 विधायकों में से एक भी फरवरी तक सौ फीसदी निधि खर्च नहीं कर सका है। नवप्रभात, राजकुमार और प्रेमचंद अग्रवाल तो 50 फीसदी राशि भी खर्च नहीं कर पाए हैं। वहीं, भाजपा विधायक सहदेव सिंह पुंडीर ने सर्वाधिक दो करोड़ सात लाख रुपये 162 योजनाओं पर खर्च की है।