दुर्गम स्कूलों से सुगम में आने के लिए खुद को गंभीर रोगी बताने वाले शिक्षकों का फर्जी मेडिकल अब नहीं चलेगा। शिक्षा निदेशालय ने एम्स और पीजीआई से हासिल किए जाने वाले मेडिकल सर्टिफिकेट को अमान्य करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है।
इसके बजाय स्टेट मेडिकल बोर्ड का सर्टिफिकेट ही शिक्षकों के तबादले का आधार बनेगा। बता दें कि सत्र 2013-14 में अनुरोध के आधार पर 3500 शिक्षकों के तबादले किए गए थे लेकिन इनमें से कुछ शिक्षकों के मेडिकल सर्टिफिकेट फर्जी होने की शिकायतें आई थीं।
ऐसे में विभाग को जांच का आदेश देना पड़ा था। इस वर्ष ऐसी स्थिति न बने, इसे देखते हुए तबादला नियमावली में यह संशोधन किया जा रहा है।
एक्यूट नहीं क्रानिक आर्थराइटिस वाले ही हकदार
नियमावली में संशोधन का यह प्रस्ताव भी तैयार किया गया है कि अब एक्यूट आर्थराइटिस के रोगियों की जगह अब सिर्फ क्रॉनिक आर्थराइटिस वाले शिक्षक ही तबादलों के लिए अनुरोध कर सकेंगे।