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उत्तराखंड के चार जल स्रोतों को मिलेगा नया जीवन, 50 वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन

Tue, 17 Nov 2020 01:00 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • जल संस्थान, टेरी स्कूल ऑफ एडवांस साइंसेज, टेरी इंस्टीट्यूट और डीएवी कॉलेज के 50 वैज्ञानिकों ने किया अध्ययन
  • मसूरी के सेलूखेत, प्रतापनगर, कर्णप्रयाग, चंबा के चार जल स्रोतों से होती है पेयजल की आपूर्ति
  • पिछले कुछ वर्षों में घट गया है जल का स्तर, सभी पहलुओं पर हुआ अध्ययन, फिर लौटेगी बहार 
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जल का स्रोत - फोटो : Social media
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विस्तार
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प्रदेश के चार बड़े जल स्रोतों को जल्द ही नया जीवन मिलेगा। राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन की ओर से इन चारों प्रमुख जल स्रोतों का अध्ययन कराया जा रहा है। उत्तराखंड जल संस्थान, टेरी स्कूल ऑफ एडवांस साइंसेज, टेरी इंस्टीट्यूट और डीएवी पीजी कॉलेज के 50 वैज्ञानिकों की टीम ने इन स्रोतों का अध्ययन किया है। 

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प्रोजेक्ट के मुख्य अन्वेषक डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि उत्तराखंड में 1150 सूखे जल स्रोतों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। इसी कड़ी में सबसे पहले मसूरी के सेलूखेत, टिहरी के प्रतापनगर और चंबा के साथ ही कर्णप्रयाग के जल स्रोतों का अध्ययन किया गया है। उन्होंने बताया कि इन सभी स्रोतों से जल संस्थान पानी की आपूर्ति करता है।

इनका जल स्तर गिरने की वजह से आपूर्ति बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। इनका सर्वे, जियोफिजिकल इनवेस्टिगेशन, मिट्टी का टेस्ट हो चुका है। पानी की गुणवत्ता की जांच भी की जा चुकी है। इसके साथ ही जीआईएस रिमोट सेंसिंग की मदद से पूरा विश्लेषण किया गया है। अब वैज्ञानिक इस कोशिश में जुटे हैं कि किस तरह से इनमें पानी की उपलब्धता को बढ़ाया जाए। इस दिशा में भी काफी हद तक कामयाबी मिल चुकी है।  
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बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं प्रदेश के जल स्रोत 

अभी तक के अध्ययन में यह बात भी सामने आई है कि प्रदेश में 14 जल स्रोत पूरी तरह से सूख चुके हैं। 77 स्रोतों का जल स्तर 75 प्रतिशत से अधिक सूख चुका है। राज्य के 330 स्रोतों के स्राव में 50 प्रतिशत की कमी आ चुकी है। कुल 1229 स्प्रिंग स्रोतों के जल स्तर पर पर्यावरणीय व अन्य कारकों का असर पड़ रहा है। वैज्ञानिक बड़े जल स्रोतों के बाद अब छोटे स्रोतों की भी जांच पड़ताल में जुट गए हैं। 

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