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RTO विभाग के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा

Fri, 03 Oct 2014 11:07 AM IST
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय से कई फर्जी कामर्शियल लाइसेंस जारी कर दिए गए हैं। एक आवेदक के दस्तावेजों की जांच के दौरान इस फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। आवेदक को पकड़ने की कोशिश की गई, लेकिन वह भाग निकला।
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फर्जी प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों के आधार पर जारी हो रहे लाइसेंस
पता चला है कि इंस्टीट्यूट आफ ट्रेनिंग एंड ड्राइविंग रिसर्च (आईटीडीआर) झाझरा के फर्जी प्रशिक्षण प्रमाणपत्रों के आधार पर पहले भी लाइसेंस जारी हो चुके हैं, लेकिन इनकी संख्या कितनी है यह अभी मालूम नहीं है। विभाग ने पुलिस को जानकारी देने के साथ मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है।

विभागीय सूत्रों ने बताया कि सोमवार को एक चालक लाइसेंस आवेदन के साथ आईटीडीआर से जारी प्रमाणपत्र लेकर एआरटीओ प्रशासन संदीप सैनी के पास पहुंचा था।

एआरटीओ ने औपचारिकताएं पूरी होने के बाद लाइसेंस पर साइन भी कर दिए, लेकिन तभी उनकी नजर आईटीडीआर के प्रमाणपत्र की नंबर सीरीज पर गई। इस चालक से पहले जो चालक आया था, उसके प्रमाणपत्र और इस प्रमाणपत्र की सीरीज में सौ अंकों का अंतर था।
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एआरटीओ ने तुरंत स्टाफ को बुलाया और आवेदक को कुछ देर बाहर इंतजार के लिए कहा। चालक बाहर गया और भाग निकला। एआरटीओ ने आईटीडीआर के कर्मचारियों को तलब किया तो पता चला कि प्रमाणपत्र संस्थान से जारी नहीं हुआ है, लेकिन यह हूबहू संस्थान के प्रमाणपत्र की तरह दिखता है।

आईटीडीआर अधिकारियों ने संदेह जताया कि फर्जीवाड़ा उस कंपनी से हुआ होगा, जहां से प्रमाणपत्र प्रिंट कराए जाते हैं।
एआरटीओ सैनी ने बताया कि सिर्फ सितंबर में ही 250 से अधिक कामर्शियल लाइसेंस जारी हुए हैं। सितंबर का रिकार्ड तलब किया गया है।

मालूम किया जाएगा कि इनमें से कितने लाइसेंस फर्जी प्रशिक्षण प्रमाणपत्र पर बने हैं। इसके बाद जुलाई, अगस्त का रिकार्ड भी खंगाला जाएगा। बताया कि शासन को जानकारी दे दी गई है। मामले की जांच चल रही है। एआरटीओ ने बताया कि फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर लाइसेंस हासिल करने वाले सभी चालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

यह है प्रक्रिया
कामर्शियल लाइसेंस लेने के लिए आवेदक को दून के झाझरा स्थित आईटीडीआर से दो दिवसीय प्रशिक्षण के बाद इसका प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है। प्रदेश सरकार का यह संस्थान पीपीपी मोड पर मारुति उद्योग लिमिटेड संचालित करता है। इसके प्रमाणपत्र के बाद ही आरटीओ से लाइसेंस मिलता है।

संवेदनशील है मामला
फर्जी लाइसेंस को आतंकवादी या दहशतगर्द पहचान पत्र के तौर पर उपयोग में ला सकते है। वहीं लाइसेंस के जरिये वह कई अन्य पहचान पत्र भी बना सकता है।

इसलिए खुफिया अमला भी मामले की संवेदनशीलता पर गंभीर हो गया है। बता दें कि कुछ समय पूर्व आईएमए की भर्ती में एक आवेदक ने फर्जी लाइसेंस के आधार पर नौकरी हासिल कर ली थी। यह मामला सीबीआई अदालत में चल रहा है।
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