देहरादून के राजपुर वीर गिरवाली गांव में रिजर्व फॉरेस्ट की जमीन से पेड़ काटने के मामले में पुलिस के बड़े खुलासे की जंगलात महकमे के अधिकारियों ने दूसरे दिन ही हवा निकाल दी।
गिरफ्तारी को गलत ठहराया
ठेकेदार कुलदीप नेगी की गिरफ्तारी को गलत ठहराते हुए वन कर्मियों ने इस मुद्दे को लेकर मोर्चा खोल दिया है। रविवार को कर्मचारी संघों के स्थानीय इकाई की रायपुर में आपात बैठक हुई जिसमें मामले पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान पुलिस कार्रवाई के खिलाफ रणनीति तैयार की गई।
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साथ ही कहा गया कि अगर पुलिस ने वन कर्मियों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई की तो प्रदेश सरकार इसका खामियाजा भुगतने के लिए तैयार रहे। बैठक में कार्बेट और राजाजी पार्क में बंदी से लेकर राज्यव्यापी आंदोलन तक की चेतावनी दी गई।
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बैठक में वन क्षेत्राधिकारी संघ के प्रांतीय महामंत्री हेम शंकर मैंदोला, सहायक वन कर्मचारी संघ के महामंत्री ऋषि पैन्यूली, वन बीट अधिकारी संघ के प्रांतीय अध्यक्ष इंद्र मोहन कोठारी के अलावा बड़ी संख्या में फारेस्ट गार्ड, फारेस्टर और रेंजर मौजूद थे।
वीर गिरवाली गांव में नौ और 18 मार्च को सागौन के 25 हरे पेड़ काटे गए थे। उन पेड़ों को लाग बनाने (टुकड़े कटवाने) के लिए वन कर्मियों ने ठेकेदार कुलदीप नेगी को बुलाया था। उसके बाद नेगी ने दो मजदूरों की मदद से उसे लाग बनाकर मालसी के वन चौकी में रखवा दिया था। इसी तथ्य को पुलिस गलत तरीके से पेश कर रही है। वैसे भी बीएस सिद्धू के एफआईआर पर हाईकोर्ट का स्थगन आदेश है। ऐसे में पुलिस जांच कर ही नहीं सकती।
- धीरज पांडे, प्रभागीय वन अधिकारी
जिस जमीन की रजिस्ट्री आईपीएस बीएस सिद्धू ने कराई है उस पर महकमे का कोई भी कर्मचारी पेड़ क्यों कटवाएगा। वह भी रजिस्ट्री होने के कुछ माह बाद ही। पुलिस सिद्धू के नियंत्रण में है। ऐसे में पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। इस प्रकरण की सीबीआई या मुख्यसचिव स्तर के अधिकारी से जांच कराई जाए, जिससे सच सामने आ सके। पुलिस की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। देहरादून पुलिस सिद्धू के दबाव में काम कर रही है।
- ऋषिराम पैन्यूली, महामंत्री सहायक वन कर्मचारी संघ
उच्चस्तरीय जांच से बच रही सरकार
जुलाई 2013 में ही हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया था कि वीर गिरवाली गांव में कटान मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए। जांच टीम में एक सीनियर आईएएस, सीनियर आईपीएस और सीनियर आईएफएस अधिकारी को शामिल करना था, लेकिन सरकार ने टीम ही गठित नहीं की।
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