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पंचायत में पद चाहिए तो मायके जाना होगा

Thu, 27 Feb 2014 12:55 PM IST
आनंद बिष्ट/ अमर उजाला, गरुड़
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उत्तराखंड में आरक्षित वर्ग की महिलाओं को यदि पंचायत में कोई पद चाहिए है तो मायके जाना ही पड़ेगा।
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चुनाव आयोग ने नेता बनने की ख्वाहिश रखने वाली महिलाओं के सामने अप्रत्यक्ष तौर मायके जाने की शर्त रख दी है।

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आयोग के आदेश के अनुसार त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षित महिला प्रत्याशी को शादी से पहले का जाति का प्रमाणपत्र देना होगा।

प्रमाणपत्र के बहाने वर्षों बाद गई मायके

आयोग के इस के बाद महिला प्रत्याशियों ने मायके की दौड़ लगानी शुरू कर दी है। कई महिलाएं तो वर्षों बाद प्रमाणपत्र लेने के बहाने मायके जा रही हैं।

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बागेश्वर के जिला पंचायतराज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह ने बताया कि महिला प्रत्याशियों को इसकी जानकारी दे दी गई है।

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वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद सिंह भंडारी ने बताया कि सामान्य जाति की कोई लड़की अनुसूचित जाति के युवक से विवाह कर ले तो उसकी जाति शादी से पहले की मान्य है। उसके संतान की जाति अनुसूचित मानी जाएगी।

प्रमाण बनाने वालों की भीड़

निर्वाचन आयोग द्वारा महिला प्रत्याशियों के लिए विवाह से पूर्व का जाति प्रमाण पत्र अनिवार्य करने से जिले के तहसील मुख्यालय में जाति प्रमाण बनाने वालों की भीड़ दिख रही है।

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इस बीच कई आरक्षित महिला प्रत्याशी जाति प्रमाण पत्र के लिए अपने मायके पहुंच गई हैं, लेकिन इतनी जल्दी जाति प्रमाणपत्र हासिल करना सबके लिए सहज नहीं है।
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जाति प्रक्रिया पर आपत्तियों का सिलसिला शुरू

एससी, एसटी के लिए तर्कसंगत है कि जाति का निर्धारण जन्म से होता है, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग का निर्धारण क्रीमी लेयर से होता है।

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इस प्रमाणपत्र की वैधता अवधि भी सीमित होती है जबकि एससी, एसटी का जाति प्रमाणपत्र आजीवन मान्य होता है। इसमें भी दूसरे प्रदेश से जारी जाति प्रमाणपत्र के यहां अमान्य होने का पेच फंसने की आशंका है।

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क्योंकि राज्य सरकार की नौकरी के मामले में दूसरे प्रदेश से जारी आरक्षित जाति प्रमाणपत्र धारक को यहां सामान्य श्रेणी का माना जाता है।
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