भाईचारा और रिश्तेदारी केंद्र सरकार की खाद्य सुरक्षा योजना को फ्लॉप करने में जुटी हुई है।
जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचेगा लाभ
योजना के क्रियान्वयन के लिए जिस तरह से पात्रों के सर्वे और सत्यापन का कार्य चल रहा है उससे यह आशंका बढ़ती जा रही है कि इसका लाभ कई जरूरतमंदों तक पहुंचना मुश्किल है।
आरोप है कि सर्वे करने वाली टीम के सदस्य योजना का लाभ देने के लिए भाईचारा और रिश्तेदारी निभा सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि सर्वे का कार्य करने वाली टीमों को ही फॉर्मों के सत्यापन की भी जिम्मेदारी दे दी गई है। इससे योजना से कई पात्र व्यक्ति वंचित हो सकते हैं तो कई अपात्रों को लाभ मिल सकता है।
यही नहीं जिला पूर्ति विभाग को तो यह भी नहीं मालूम की लोगों को कितने फॉर्म बांटे गए हैं और लोगों ने कितने फॉर्म जमा कराए हैं। जबकि विभाग ने ढाई लाख फॉर्म सर्वे के लिए छपवाए थे।
दून जिले में खाद्य सुरक्षा योजना के लिए पात्रों का चयन करने के लिए सर्वे की जिम्मेदारी नगर निगम क्षेत्र में निगम कर्मचारियों और अन्य क्षेत्रों में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की टीमों को दी गई है। इन टीमों को फॉर्म भरवाकर जिला पूर्ति कार्यालय में जमा करना था।
पात्र और अपात्र का चयन
यहां पर विभाग के पूर्ति निरीक्षक फॉर्मों की जांच करने के बाद पात्र और अपात्र का चयन करते। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। पूर्ति विभाग को तो यह भी नहीं मालूम के उसके ढाई लाख फॉर्म कहां बांट दिए गए और कहां जमा कराये गए हैं
यही नहीं अब सर्वे करने वाली टीमों को ही पात्रों के सत्यापन का भी कार्य दे दिया गया है। इस वजह से से इसमें गड़बड़ियों की आशंका जताई जा रही है।
जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम का कहना है कि सर्वे वालों से ही सत्यापन करा रहे हैं लेकिन इसमें किसी तरह की गड़बड़ी नहीं होने दी जाएगी।
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