उन्होंने बताया कि 100 साल पहले जिम कॉर्बेट से जुड़े क्षेत्र कैसे थे, आज कैसे हैं, यहां अब क्या परिवर्तन हुआ, वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण पर यहां कितना काम हो रहा है, यह भी इस फिल्म के माध्यम से दिखाया जाएगा। यहां के लोगों को ईको टूरिज्म से जोड़कर स्वरोजगार से कैसे जोड़ा जा सकता है, ऐसा मार्गदर्शन भी यह फिल्म करेगी।
आज मानव-वन्यजीव संघर्ष की तमाम घटनाएं हो रहीं हैं। जंगलों से वन्यजीव कम हो रहे हैं। बाघ, तेंदुए आबादी की तरफ आ रहे हैं और मवेशियों को भी शिकार बना रहे हैं। इस समस्या का क्या हाल हो सकता है, फिल्म में यह भी खोजने की कोशिश की जा रही है।
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पर्यटक स्थलों का सरंक्षण जरूरी
डॉ. जेएस रावत ने कहा कि कई पर्यटन स्थलों पर पॉलीथिन, प्लास्टिक काफी तादाद में पड़ा हुआ है, जो प्रकृति के लिए नुकसानदेह है, इसके लिए जनता को भी जागरूक होना होगा। क्षेत्र की विरासत, पर्यावरण आदि की जागरूकता के लिए स्कूलों में भी बच्चों के लिए अलग से विषय शुरू करने की जरूरत है। कहा कि जंगलों के साथ ही उत्तराखंड की नदियां और महाशीर मछलियों का संरक्षण बहुत जरूरी है।