किसान ठान ले तो बंजर जमीन भी सोना उगलने लगती है। बस जरूरत है परंपरागत तरीकों को छोड़कर खेती के नए तौर तरीकों की।
22 किस्म के फल उगाए
इस बात को साबित किया है उत्तरकाशी के पुरोला ब्लॉक के खलाडी गांव निवासी युद्धवीर सिंह रावत ने। उन्होंने न केवल 22 किस्म के फल उगा दिए बल्कि टमाटर की ऐसी प्रजाति भी तैयार कर रहे हैं जो कि साल में कम से कम आठ महीने तक कमाई का जरिया बनेगी।
बुधवार को हिमाचलन एक्शन रिसर्च सेंटर (हार्क) ने युद्धवीर को कृषि पितामह के सम्मान से नवाजा। 80 वर्षीय युद्धवीर सिंह रावत वर्ष 1964 से खेती कर रहे हैं। उन्हें हमेशा इस बात का दुख होता था कि जो टमाटर वह इतनी मेहनत से उगाते हैं, उस पर केवल 80 पैसे प्रति किलो की कमाई होती है।
उन्होंने अफसरों के सामने मामला उठाया तो मदर डेयरी का ट्रक माल खरीदने पहुंचा। इससे कमाई बढ़कर सीधे पांच रुपए प्रति किलो हो गई। इससे युद्धवीर का हौसला बढ़ा और उन्होंने नए-नए प्रयोग कर 22 किस्म के फल उगा दिए। उन्होंने बताया कि वह लगातार नए-नए प्रयोग करते रहते हैं।
आजकल वह टमाटर की ऐसी फसल तैयार करने में जुटे हैं जो कि साल में कम से कम आठ महीने तक चल सके। अभी तक यह फसल सिर्फ दो महीने की होती है। वह अपने खेतों के टमाटर, जापानी कीवी और परसीमन भी साथ लाए थे।
तीन लाख सालाना पहुंचाया कारोबार
रवाई घाटी फल सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष जगमोहन सिंह ने अपनी मेहनत के दम पर खेतों से सोना पैदा किया।
उन्होंने फल और सब्जी की वार्षिक आमदनी को कुछ हजार से बढ़ाकर तीन लाख रुपए तक पहुंचा दिया। युवा किसान आज स्थानीय किसानों के लिए एक मार्गदर्शक हैं। इन्हें किसान मित्र सम्मान से नवाजा गया।
मटर-टमाटर से कमाए चार लाख
उत्तरकाशी के मुलाणा गांव निवासी सुरेश रमोला ने अपनी मेहनत के दम पर एक साल में मटर और टमाटर से चार लाख रुपये का व्यवसाय किया। अन्य सब्जी उत्पादकों के लिए वे एक मिसाल हैं। उन्हें किसान सम्मान पत्र से नवाजा गया।
इनका भी हुआ सम्मान
मोहन सिंह मीणा, श्रीचंद्र राणा मंजियाली, दीवान सिंह थली, भगवानी देवी सुनारा, राजकुमारी मुराडी, गुड्डी देवी जिलासू, दलीप सिंह रावत, गजे सिंह नेगी, मथुरा प्रसाद त्रिपाठी, सूरजमणि मैंदोल और जयेंद्र सिंह राणा।