चुनाव में कार्यकर्ताओं को खाना खिलाने का खर्च प्रत्याशियों के खाते में जुड़ने की बात तो आपने सुनी ही होगी लेकिन इस बार निर्वाचन आयोग की ओर से प्रत्याशियों को हवा खिलाने की दर भी तय कर दी गई है।
कार्यकर्ताओं को हवा खिलाने का हिसाब प्रत्याशियों को देना होगा। पंखे की हवा का कम और कूलर की ठंडी हवा का खर्च ज्यादा होगा।
लोकसभा चुनाव के दौरान कड़क गर्मी का सीजन होगा। प्रत्याशियों के चुनावी कार्यालयों और सभाओं में पंखे और कूलर भी खूब चलेंगे।
पंखे कूलर का रखना होगा हिसाब
अभी तक इनका हिसाब-किताब रखने की जरूरत नहीं समझी जाती थी लेकिन अब इनका पूरा हिसाब-किताब प्रत्याशियों को रखना होगा और निर्वाचन आयोग को उपलब्ध कराना होगा।
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कार्यकर्ताओं को लुभाने के लिए पंखे के बजाए कूलर चलाए तो चुनावी खर्च में ज्यादा धनराशि जुड़ेगी। प्रत्याशी जहां स्वयं इनका हिसाब देंगे वहीं निर्वाचन अधिकारी और उनके सहायक भी पंखों-कूलर पर नजर रखेंगे।
आयोग की चाय सस्ती, समोसा महंगा
निर्वाचन आयोग की ओर से चाय और समोसे की भी दरें तय की गई हैं। लेकिन चाय की दर हरिद्वार के बाजार से सस्ती और समोसा की दर ज्यादा है।
हरिद्वार में चाय छह रुपये से कम कहीं नहीं मिलती लेकिन निर्वाचन आयोग ने इसकी दर पांच रुपये तय की है। हरिद्वार में समोसा सात रुपये में आसानी से मिल जाता है परंतु निर्वाचन आयोग ने इसकी दर 10 रुपये तय की है।
आरामदायक कुर्सी पर बैठने का ज्यादा खर्च
सभाओं में कुर्सियों के भी रेट तय किए गए हैं। प्लास्टिक की सामान्य कुर्सी पर कार्यकर्ताओं को बैठाने के जहां छह रुपये खर्च में जुड़ेंगे, वहीं कुशन कुर्सी पर यह खर्च 10 रुपये तक चला जाएगा।