बैंकों की बड़ी शाखाओं पर काउंटिंग मशीन के साथ अब फेक नोट डिटेक्टर भी रखे जाने लगे हैं। जानकार कहते हैं कि एटीएम के लिए नोट देने से पहले इन शाखाओं को मशीन के काउंटर से गुजारा जाता है।
नकली नोट कई बार सामने आ चुके हैं। जिन्हें रजिस्टर में चढ़ाकर रिजर्व बैंक आफ इंडिया (आरबीआई) को भेज दिया जाता है। लेकिन सवाल यह कि छोटी शाखाओं पर नजर का कोई तरीका नहीं।
फेक नोट डिटेक्टर है ही नहीं
बता दें कि ज्यादातर शाखाएं ऐसी हैं, जहां फेक नोट डिटेक्टर है ही नहीं। यहां नकली नोट अगर सामने भी आते हैं तो उन्हें बजाए आरबीआई भेजने के नष्ट कर दिया जाता है।
बैंक अधिकारियों की मानें तो जोनल कार्यालयों में पुलिस की तरफ से इस संबंध में सतर्कता बरतने के पत्र पहुंच चुके हैं, लिहाजा जल्द ही शाखाओं पर भी इस संबंध में सख्ती बरती जाएगी।
शक के आधार पर भी नोट का टेस्ट कर लिया जाता है। अल्ट्रा वायलेट किरणों से
गुजरकर नोट का सच सामने आ जाता है, लेकिन जो बिजनेस ब्रांचेज हैं, वहां
वाकई समस्या है। इतनी भीड़ रहती है कि एक-एक नोट की सचाई पता करना कई बार
कर्मियों के लिए संभव नहीं हो पाता। अलबत्ता, पूरी सावधानी बरती जाती है।
- रमेश कुमार, एसबीआई