प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल की व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग के बीच झूल रहे अस्पताल में दवा, रुई से लेकर अन्य जरूरी चीजों का टोटा बना हुआ है। दूसरी ओर चिकित्सकों के बीच लड़ाई चरम पर है। इन सब अव्यवस्थाओं का खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है।
दून अस्पताल और दून महिला अस्पताल को जोड़कर राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के टीचिंग हॉस्पिटल के रूप में सरकार इसे विकसित कर रही है। इसे राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल नाम दिया गया है। सरकार ने अस्पतालों को जोड़कर एक करने के बाद अप्रैल तक के लिए वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार बांट दिए। बस यहीं से गड़बड़ शुरू हुई। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने तुरंत हाथ पीछे खींच लिए। उनका मानना है कि अप्रैल से जब चिकित्सा शिक्षा विभाग को व्यवस्थाएं संभालनी है, तो वह अभी से क्यों नहीं संभाल लेते।
दूसरी ओर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारी फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं। उनका कहना है कि फिलहाल व्यवस्था बनाने का काम स्वास्थ्य विभाग का है। अप्रैल से वह अपने हिसाब से व्यवस्था बनाएंगे। इसके चलते अस्पताल में ना तो मरीजों को दवा मिल पा रही है और ना ही अन्य सुविधाएं। दूसरी ओर दोनों विभागों के चिकित्सकों के झगड़े के चलते मरीजों को बेहतर उपचार भी नहीं मिल पा रहा है।
इनका है कहना
शासन की ओर से हमें जो दिशा-निर्देश मिले हैं, उनका अनुपालन किया जा रहा है। जो व्यवस्थाएं चिकित्सा शिक्षा विभाग के स्तर से होनी है, वह हम कैसे कर सकते हैं।
- डॉ. आरएस असवाल, पीएमएस, दून अस्पताल
अप्रैल तक अस्पताल की व्यवस्थाओं का जिम्मा स्वास्थ्य विभाग को संभालना है। उसके बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग व्यवस्था करेगा।
- डॉ. केके टम्टा, चिकित्साधीक्षक, दून मेडिकल कॉलेज