पराबैगनी किरणों के परावर्तन से प्रभावित हो रहा आंखों का पर्द
दून मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग के चिकित्सक डॉ. सुशील ओझा बताते हैं कि बर्फ में सूर्य की किरणें समाहित नहीं हो पाती हैं। ऐसे में वे परावर्तित होकर सीधे वहां मौजूद लोगों की आखों में जाती हैं। इससे पहले तो फोटो रिसेप्टर फिर बाद में आंख के पर्दे का शेष का हिस्सा प्रभावित होता है। इससे नाखूना (आंख के सफेद हिस्से पर मांस चढ़ना) का खतरा बढ़ता है।चिकित्सकों के मुताबिक मनुष्य की आंख में 0.5 सेंटीमीटर का मैक्यूला मौजूद है। जब पराबैगनी किरणें परावर्तित होकर मैक्यूला को क्षति पहुंचाती है, तो इससे पीड़ित की 80 प्रतिशत तक रोशनी चली जाती है।
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400 से 700 नैनो मीटर वेवलेंथ की रोशनी आखों के लिए सहज
चिकित्सक डॉ. रिजवी के मुताबिक आंखों के लिए 400 से 700 नैनो मीटर वेवलेंथ की रोशनी काफी सहज मानी जाती है। इससे कम और ज्यादा वेवलेंथ की रोशनी आंखों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
बचाव के उपाय
1- 6 से 8 घंटे की नींद लेना जरूरी है।
2- शरीर में विटामिन-ए की मात्रा बढ़ाएं।
3- काले अंगूर का सेवन करें।
4- धूप में सनग्लास का इस्तेमाल करें।