डॉ. साईं का यह भी कहना है कि छोटे-छोटे भूकंपों के आने का मतलब यह कतई नहीं है कि किसी बड़े भूकंप के आने की संभावना है। भूकंप के आने के समय और रिक्टर स्केल पर उसकी क्षमता का पूर्वानुमान अभी तक संभव नहीं है। फिलहाल देश के किसी भी हिस्से में आने वाले भूकंपों पर संस्थान के वैज्ञानिकों की नजर है।
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वरिष्ठ भूकंप विज्ञानी डॉ. सुशील कुमार रुहेला के अनुसार, भूगर्भीय इंडियन प्लेट यूरेशियन प्लेट की ओर खिसक रही है। इसमें इंडियन प्लेट हर साल 40 से 50 मिलीमीटर तक यूरेशियन प्लेट की ओर खिसक रही है। जिसकी वजह से समय-समय पर भूगर्भीय हलचल हो रही है। उनका यह भी कहना है कि इंडियन प्लेट के यूरेशियन प्लेट से टकराने की वजह से ही हिमालय पर्वत श्रृंखला का निर्माण हुआ था।
नई दिल्ली एनसीआर में पिछले तीन माह के भीतर आए सभी भूकंपों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है। जिसके लिए संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम गढ़वाल क्षेत्र में स्थापित किए गए सभी 17 सीस्मिक स्टेशनों का डाटा का अध्ययन कर रही है।
- डॉ कालाचंद साईं, निदेशक, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी