इसके अलावा अन्य अधिकारियों और दूसरे लोगों को सदस्य के तौर पर शामिल किया जाता है। प्रमुख सचिव वन आरके सुधांशु ने बताया कि राजाजी नेशनल पार्क के टाइगर रिजर्व बन जाने के बाद वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत टाइगर फाउंडेशन का गठन किया जाना आवश्यक है। प्राथमिक तौर पर इसकी कवायद शुरू कर दी गई है। वन अधिकारियों को एक माह में बायलॉज तैयार करने को कहा गया है। इसके बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। बैठक में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. मधुर पराग धकाते, निदेशक राजाजी टाइगर रिजर्व डॉ. साकेत बडोला आदि मौजूद थे।
कॉर्बेट फाउंडेशन की स्थापना वर्ष 2010 में हो गई थी। इसके तहत बाघ संरक्षण के अलावा विभिन्न गतिविधियां संचालित की जाती हैं। इसमें स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी के साथ वन्यजीवों के संरक्षण के लिए काम किया जाता है। इसके अलावा पारिस्थितिक अनुसंधान, जैव विविधता संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने, वन्यजीवों की आवास बहाली, स्थायी आजीविका, वाटरशेड विकास, सतत ग्रामीण विकास, मानव और पशु स्वास्थ्य जैसी गतिविधियां फाउंडेशन के माध्यम से संचालित की जाती हैं।