उत्तराखंड के अशासकीय स्कूलों में 508 पीटीए शिक्षकों की नियुक्ति में धांधली का मामला सामने आया है। आरोप है कि इन नियुक्तियों में सभी नियमों को दरकिनार किया गया। पहले तो शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास किए बिना पीटीए शिक्षकों को नियुक्त किया गया। इसके बाद इनमें से अधिकतर को तदर्थ और नियमित नियुक्ति दे दी गई। शासन और शिक्षा महानिदेशालय के निर्देश पर इस मामले में अब जांच शुरू हो गई है।
स्कूलों में शिक्षकों की कमी होने पर कामचलाऊ व्यवस्था के तहत शिक्षक अभिभावक संघ की ओर से शिक्षकों को रखा जाता है। ये पीटीए शिक्षक कुछ समय बाद मानदेय की परिधि में आ जाते हैं और फिर तदर्थ और नियमित नियुक्ति पा जाते हैं। तदर्थ शिक्षक को भी नियमित शिक्षक के बराबर वेतन मिलता है। नियमानुसार इसके लिए योग्य उम्मीदवारों से आवेदन मांगे जाने चाहिए। शिक्षक बनने के लिए टीईटी भी अनिवार्य है।
जिन पीटीए शिक्षकों, तदर्थ और नियमित नियुक्तियों में धांधली का आरोप है वह 2017 के बाद हुई हैं। शासन को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शिक्षक अभिभावक संघ के जरिये नौकरी और फिर तदर्थ नियुक्ति पाने के लिए हर शिक्षक से 15-15 लाख रुपये की रकम तय की गई है।