राष्ट्रीय प्रतिदर्श संगठन (एनएसएओ) के 2011-12 के सर्वे में उत्तराखंड में गरीबी की दर 16.9 प्रतिशत आंकी गई थी। वर्ष 2004-05 में 32.7 प्रतिशत गरीबी थी। उत्तराखंड मानव विकास सर्वेक्षण रिपोर्ट-2017 के मुताबिक, प्रदेश में 15.6 प्रतिशत गरीब हैं। वर्ष 2014 में भी लखनऊ के गिरि इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (जीआईडीएस) के साथ मिलकर उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में गरीबी के आंकड़े सामने आए थे। इस सर्वे के मुताबिक, ग्रामीण इलाकों में गरीबी 17.9 और शहरी क्षेत्र में 11.1 प्रतिशत आंकी गई थी।
चंपावत सबसे गरीब जिला, पहाड़ी जिले बदतर
चंपावत-35.2, अल्मोड़ा 30.7, चमोली 27.4, ऊधमसिंह नगर 18.7, रुद्रप्रयाग में 18.3, हरिद्वार 15.3, पौड़ी गढ़वाल 14.8, नैनीताल में 13.7, टिहरी गढ़वाल 13, पिथौरागढ़ 13, बागेश्वर 11.8, उत्तरकाशी 9.9 देहरादून जिले में 7.1 प्रतिशत गरीबी है।
मैदान में पहाड़ से कम गरीब
प्रदेश में पहाड़ में गरीबी का प्रतिशत 17.9 है तो मैदान में 13.6 प्रतिशत है। पहाड़ के ग्रामीण इलाकों में गरीबी 19.6 प्रतिशत तो शहरी क्षेत्र में 11.3 प्रतिशत है। वहीं मैदान के ग्रामीण इलाकों में गरीबी 15.7 प्रतिशत तो शहरी क्षेत्र में 11.1 प्रतिशत है।
वर्ष 2011 के बाद से गरीबी को लेकर कोई प्रमाणिक सर्वे नहीं हुआ है। इस सप्ताह से निदेशालय का सर्वे शुरू हो जाएगा। सर्वे के आंकड़े योजना का स्वरूप तय करने में सहायक होंगे। अभी पुराने आंकड़ों के आधार पर योजनाएं तैयार हो रही हैं। नए आंकड़े आएंगे तो उस लिहाज सरकार अपना फोकस एरिया तय कर सकेगी।
- डॉ. मनोज कुमार पंत, संयुक्त निदेशक, अर्थ एवं संख्या निदेशालय