चिंतामणि बताते हैं कि कीवी मध्य हिमालयी क्षेत्र के 1200 से 2000 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अच्छी पैदावार देता है। यह एंटीऑक्सीडेंट के साथ ही हाई ब्लड प्रेशर, डेंगू आदि रोगों के लिए कारगर दवाई का काम करता है।
कीवी एक बेलदार पौध है, जो पूर्व में चायनीज गुज वेरी के नाम से जाना जाता था । मगर 1960 के बाद न्यूजीलैंड ने इसका पेटेंट अपने नाम कर इसे कीवी नाम दे दिया। ठंडी तासीर का फल होने के कारण यह मध्य हिमालयी क्षेत्रों में उत्पादित होता है।
जिले में कीवी उत्पादन के लिए अनुकूल जलवायु है। यहां के काश्तकार निजी स्रोत से सफलतापूर्वक इसकी खेती कर अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं। इसे देखते हुए विभाग ने इसे हॉर्टिकल्चर टेक्नोलॉजी मिशन में शामिल किया है। आगामी सालों में क्षेत्रफल विस्तार योजना के तहत किसानों को 30000 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान सरकार की ओर से देकर इसे आगे बढ़ाया जाएगा।
-सतीश शर्मा, जिला उद्यान अधिकारी, चंपावत