सरकारी महकमे पहली बार सीखेंगे कैसे रखें पर्यावरण का ख्याल
राज्य गठन के 22 साल बाद पहली बार निर्माण से जुड़े सरकारी महकमे सीखेंगे कि विकास कार्यों के बीच पर्यावरण का ख्याल कैसे रखना है? वन महकमे की पहल पर सरकारी विभागों के लिए चार जून को एक कार्यशाला होने जा रही है। इस कार्यशाला में विशेषज्ञ अलग-अलग विषयों पर सरकारी महकमों से जुड़े अफसरों को पर्यावरण का मंत्र देंगे। कार्यक्रम के सूत्रधार अपर प्रमुख वन संरक्षक (पर्यावरण) एसएस रसाईली कहते हैं, पर्यावरणीय संवेदनशीलता धरती पर जीवन को संभव बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है लेकिन उतना ही जरूरी राज्य के विकास कार्य को पर्यावरण से संबंधित विधिक मानकों के अनुरूप कार्य करने के लिए भी आवश्यक है। वन मुख्यालय परिसर में होने वाली इस कार्यशाला में वन एवं पर्यावरण संरक्षण- आवश्यकता या विलासिता, पर्यावरण संरक्षण में सामान्य जनमानस की चिंताएं एवं अपेक्षाएं, वन संरक्षण अधिनियम 1980 के प्रावधान और उनका पालन, पर्यावरण मित्र अभियांत्रिकी की संभावनाएं जैसे अहम विषयों पर विशेषज्ञ अपनी राय रखेंगे।
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पर्यावरणीय जागरूकता की कमी, होता है टकराव
पर्यावरणीय जागरूकता की कमी से निर्माण कार्यों से जुड़ी सरकारी एजेंसियां के बीच टकराव के हालात पैदा हो जाते हैं। अकसर वन महकमा पर्यावरणीय सवालों के कठघरे में दिखाई देता है। अटके विकास कार्यों का ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ने की ऐसी तमाम कहानियां सामने आती हैं।
इन महकमों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
कार्यशाला में लोनिवि, सिंचाई, ग्रामीण विकास, पेयजल, जल संस्थान, ऊर्जा समेत निर्माण कार्यों से जुड़े महकमों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
ये विशेषज्ञ देंगे व्याख्यान
अपर प्रमुख संरक्षक वन एवं पर्यावरण डॉ. समीर सिन्हा, समाजसेवी अनूप नौटियाल, सीबीआरआई के निदेशक अशोक कुमार, एफआरआई के विशेषज्ञ।