शनिवार को कर्मचारियों के सबसे बड़े संगठन राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आखिरकार विरोध का रास्ता अख्तियार कर लिया है। पंचायत सभागार में हुई प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में आंदोलन का ऐलान कर दिया गया।
सोमवार को शासन के साथ होने वाली बैठक में सकारात्मक नतीजे न निकलने पर कर्मचारियों ने 30 जुलाई के बाद हड़ताल का फैसला किया है। इससे पहले धरना प्रदर्शन और गेट मीटिंग के जरिए विरोध जताया जाएगा।
बैठक में पदाधिकारियों का साफ कहना था कि बार-बार के आश्वासन के बाद भी मांगों पर स्थिति जस की तस है। प्रदेश प्रवक्ता अरुण पांडे के मुताबिक करीब-करीब हर जिले से विरोध सामने आया है। ऐसे में परिषद के पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
11 मई को मुख्य सचिव एन रविशंकर के साथ कर्मचारी संगठनों की संयुक्त बैठक होगी। इस बैठक में सकारात्मक नतीजा न निकला तो आंदोलन तय है।