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वेतन विसंगति समिति पर चढ़ा कर्मचारियों का पारा

Fri, 26 Jun 2015 02:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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सचिवालय में हुई वेतन विसंगति समिति की बैठक में कुछ ही मामलों पर फैसला हो पाया। जबकि कुछ मामलों को परीक्षण के नाम पर लटका दिया गया है। इतना जरूर है कि समिति ने वर्ग तीन के कर्मचारियों का ग्रेड पे 2000 से बढ़ाकर 2400 करने पर सहमति दे दी है। इससे करीब 10 हजार कर्मचारियों को फायदा होने की उम्मीद है।
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कई अन्य मामलों में फैसला न होने पर कर्मचारी संगठन भी नाराज हैं और अब इनकी निगाह मंत्रिमंडल उपसमिति पर है। इनका कहना है कि आंदोलन जारी रहेगा।

वेतन विसंगति समिति के पास बृहस्पतिवार को करीबतीन दर्जन विभागों के मामले थे। इनमें से वर्ग तीन के कर्मचारियों का ग्रेड पे 2000 से बढ़ाकर 2400 करने पर समिति ने सहमति जाहिर की। पर साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि कर्मचारियों को इसका एरियर शासनादेश जारी होने की तिथि से ही देय माना जाएगा न कि 2006 से। क्योंकि छठवें वेतन आयोग की संस्तुतियों को 2006 से लागू किया गया था।

वहीं, कर्मचारियों के वेतन भत्तों के मामले में समिति ने कहा कि इन मामलों का परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण पूरा होने के साथ ही इन पर फैसला किया जाएगा।
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कर्मचारियों की नाराजगी बढ़ी, मामला लटकाने का आरोप

वेतन विसंगति समिति की बैठक में कई मामलों पर फैसला न होने से अब राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद की नाराजगी बढ़ गई है। परिषद के प्रवक्ता अरुण पांडे का कहना है कि वेतन विसंगतियों के मामलों को जबरन लटकाया जा रहा है। परिषद की कोशिश होगी कि राजस्व मंत्री यशपाल आर्य की अध्यक्षता में गठित मंत्रिमंडल उपसमिति के सामने पूरे मामले रखे जाएं। कर्मचारियों को अब उप समिति से ही उम्मीद है।

बता दें कि पूर्व में मुख्य सचिव एन रविशंकर भी वेतन विसंगतियों के सभी मामलों को 15 जून तक निस्तारित करने का आदेश दे चुके हैं। इसके बावजूद वेतन विसंगति समिति की बैठक 25 जून को हुई।

उधर कैबिनेट उपसमिति ने 30 जून तक वेतन विसंगति के सभी मामले निस्तारित करने को कहा हुआ है। उपसमिति का कहना था कि इसके बाद मंत्रिमंडल उपसमिति बैठक कर फैसला करेगी।
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