उत्तराखंड में दो दिनों से हो रही भारी बारिश बिजली पर भी आफत बनकर बरसी है। नदियों के उफान से राज्य सरकार की 12 में 10 जल विद्युत परियोजनाओं की टरबाइनें थम गई जबकि विद्युत लाइनें टूटने से प्रदेश के कई क्षेत्र अंधेरे में डूब गए।
बृहस्पतिवार रात से शुरू हुई तेज बारिश से नदियों का जल स्तर बढ़ने लगा था। नदियों में बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा आने से राज्य जल विद्युत निगम के ढकरानी, ढालीपुर, कुल्हाल, मनेरी भाली-द्वितीय, चीला, पथरी, मोहम्मदपुर, खटीमा जल विद्युत गृहों से शुक्रवार से शनिवार रात तक कोई विद्युत उत्पादन नहीं हो पाया।
मनेरी भाली से उत्पादन ठप
10 दिन से बंद कालागढ़ और मनेरी भाली-प्रथम से भी विद्युत उत्पादन नहीं हुआ। सिर्फ यमुना वैली में छिबरो और खोदरी जल विद्युत गृह से ही उत्पादन मिला।
15 अगस्त को राज्य सरकार के जल विद्युत गृहों से एक करोड़ 28 लाख दस हजार यूनिट उत्पादन हुआ जबकि विद्युत मांग दो करोड़ 80 लाख 30 हजार यूनिट के सापेक्ष राज्य के विद्युत गृहों, केंद्रीय सेक्टर और अन्य स्रोतों को शामिल करते हुए कुल दो करोड़ 79 लाख 80 हजार यूनिट रही।
शनिवार शाम तक सिर्फ 60 लाख यूनिट बिजली 17 अगस्त के लिए हिमाचल से ऊर्जा निगम ने 25 लाख यूनिट बिजली खरीदी है।
प्रदेश के कई हिस्सों में कटौती
शनिवार को ऊर्जा निगम ने शाम तक हरिद्वार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में चार घंटे, गढ़वाल की नान कंटीनियस इंडस्ट्री और सिडकुल में छह घंटे, गढ़वाल मंडल के छोटे शहरों में ढाई घंटे, ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्रों में दो घंटे की विद्युत कटौती की गई।