उत्तराखंड जलविद्युत निगम के जलविद्युत गृहों के बाद केंद्र स्तरीय पावर हाउसों और थर्मल प्लांट पर भी मौसम की मार पड़ने लगी है।
बारिश के दौरान सिल्ट और अन्य वजहों से केंद्रीय जलविद्युत गृहों से बिजली उत्पादन गिरने लगा है। इसके चलते उत्तराखंड को सेंट्रल पूल से मिलने वाली बिजली पर भी असर पड़ा है। दूसरी ओर प्रदेश के कालागढ़ और मनेरी भाली प्रथम परियोजना करीब तीन सप्ताह बाद भी शुरू नहीं हो सकी हैं। ऐसे में सोमवार को प्रदेशभर में घंटों की कटौती की गई।
कहां से कितनी मिली बिजली
परियोजना----------------तय बिजली---------मिली
कलहगांव थर्मल प्लांट---------26.41---------19.62
ससन थर्मल प्लांट-----------61.50---------46.13
ऊंचाहार 1 थर्मल प्लांट---------34.31---------16.14
कोटेश्वर जलविद्युत गृह---------51.19---------22.97
टिहरी जलविद्युत गृह---------139.97---------60.52
(बिजली की मात्रा मेगावाट में, सभी परियोजनाएं केंद्र की)
प्रदेश में 39 लाख यूनिट रही कम
राज्य के जलविद्युत गृहों से कुल एक करोड़ 60 लाख 80 हजार यूनिट बिजली उत्पादन हुआ। केंद्रीय सेक्टर और अन्य स्रोतों को मिलाकर कुल उपलब्धता तीन करोड़ 28 लाख दस हजार यूनिट रही, जबकि कुल मांग तीन करोड़ 67 लाख यूनिट थी।
यानी प्रदेश में कुल 39 लाख यूनिट बिजली की कमी रही, जिसे कटौती के जरिये पूरा किया गया। सोमवार को हिमाचल से 25 लाख यूनिट बिजली खरीदी गई। इतनी ही बिजली मंगलवार के लिए भी खरीद ली गई है।
कहां कितनी कटौती
साढ़े तीन घंटे: हरिद्वार जिले के ग्रामीण क्षेत्र और ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्र
तीन घंटे: गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के छोटे शहर
दो घंटे: रुद्रपुर, रुड़की, काशीपुर, हल्द्वानी, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर की नॉन कंटीन्यूअस इंडस्ट्री
एक घंटा: सिडकुल हरिद्वार और पंतनगर