उत्तराखंड में बिजली की मांग रिकार्ड चार करोड़ यूनिट पार कर गई। इससे ग्रिड पर अत्यधिक लोड बढ़ गया।
ग्रिड बचाने के लिए ऊर्जा निगम को राज्य के विभिन्न हिस्सों में शनिवार को कटौती करनी पड़ी। बिजली की यह मांग राज्य बनने के बाद सर्वाधिक बताई जा रही है। पारा चढ़ने के साथ राज्य में बिजली की मांग भी उछाल मार रही है।
एसी, कूलर, पंखों का इस्तेमाल बढ़ने, उद्योगों में ज्यादा बिजली खर्च होने से मांग बढ़ गई है। राज्य में लगातार बढ़ रही उपभोक्ताओं की संख्या से भी बिजली की मांग में पिछले वर्षों की तुलना में यह अंतर आया है।
शनिवार को बिजली की मांग ने पंद्रह साल का रिकार्ड तोड़ दिया। राज्य में बिजली की मांग 4.10 करोड़ यूनिट पहुंच गई। पिछले साल सर्वाधिक मांग चार करोड़ यूनिट तक पहुंची थी।
उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) के जल विद्युत गृहों से 1.58 करोड़ बिजली पैदा हुई। यूजेवीएनएल के विद्युत गृहों, केंद्रीय सेक्टर और अन्य स्रोतों से कुल उपलब्धता तीन करोड़ 91 लाख 40 हजार यूनिट रही।
यूजेवीएनल के 240 मेगावाट क्षमता के छिबरो जल विद्युत गृह से नदी में पानी का जल स्तर कम होने के कारण 80 मेगावाट बिजली उत्पादन मिल पाया। ऊर्जा निगम के प्रवक्ता मधुसूदन ने बताया कि गर्मी में बिजली की मांग बढ़ने पर लाइनों पर ओवरलोड का खतरा बन रहा है। लाइनों को बचाने के लिए कुछ जगह बीच-बीच में शटडाउन लेना पड़ रहा है।
यहां हुई कटौती
लोड बढ़ने पर ऋषिकेश लाइन पर ट्रांसफार्मर को ओवरलोडिंग से बचाने के लिए ऊर्जा निगम ने सिडकुल हरिद्वार, नान कंटीनियस इंडस्ट्री ऋषिकेश, कोटद्वार और ज्वालापुर में तीन घंटे की विद्युत कटौती की।