कई बिजली उपभोक्ता ऊर्जा निगम को समय पर बिजली का बिल और कर नहीं चुका रहे। इस कारण उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन (यूपीसीएल) आठ करोड़ रुपए के कर्ज में है।
इससे उबरने के लिए यूपीसीएल उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग से बिजली के रेट बढ़ाने की मांग कर रहा है। अब मार्च आखिर तक राज्य के बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर भार बढ़ सकता है। इसका फैसला आयोग गढ़वाल में होने वाली बैठक के बाद लेगा।
अगर आयोग यूपीसीएल के प्रस्तावित दामों को हरी झंडी देता है तो वित्तीय वर्ष 2017-18 में बिजली दामों में 22.41 फीसद की बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल आयोग अभी बिजली के रेट बढ़ाने में कोई जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहता। इसीलिए आयोग राज्य में कई जगहों पर बैठक कर बिजली के प्रस्तावित रेट पर उपभोक्ताओं की भी राय ले रहा है।
यूपीसीएल ने बिजली के दाम बढ़ाने की पैरवी की
बिजली का बिल
जिले में भी बुधवार को आयोग के समक्ष यूपीसीएल ने बिजली के दाम बढ़ाने की पैरवी की थी, इसको उपभोक्ताओं ने सिरे से खारिज कर दिया था। अगर बिजली के दाम बढ़ते हैं तो यह एक साल तक लागू रहेंगे। उसके बाद दोबारा बैठक कर दामों पर चर्चा की जाएगी। आयोग अब गढ़वाल मंडल में भी दो मार्च को यूपीसीएल एवं उपभोक्ताओं की बैठक करेगा।
अगर आयोग यूपीसीएल की दलीलों को स्वीकार करता है तो 25 मार्च के बाद बिजली के दाम बढ़ाए जा सकते हैं। इससे सिडकुल कंपनियों के मालिकों पर अधिक असर पड़ेगा और साथ ही दाम अधिक होने से आम उपभोक्ताओं के कंधों का भी भार पड़ेगा। किसान पहले ही इस फैसले के खिलाफ हैं, क्योंकि किसानों का कहना है पहले ही उन्हें फसलों के बीज महंगे होने की चिंता है और बिजली के दाम बढ़ने से वह और कर्ज के भंवर में फंस जाएंगे।
यूपीसीएल अधिकारियों द्वारा बिजली के दाम बढ़ाने का आग्रह किया जा रहा है। इस पर अंतिम फैसला गढ़वाल और टिहरी में होने वाली बैठक के बाद लिया जाएगा। उपभोक्ताओं की राय जानकर दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। अगर आयोग दाम बढ़ाता है तो यह दाम एक अप्रैल से लागू हो जाएंगे।
- दीपक कुमार, उपनिदेशक, उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग, देहरादून