वैसे तो उत्तराखंड की ब्यूरोक्रेसी में हर पखवाड़े फेरबदल होता ही रहता है, लेकिन इस बार बड़े बदलाव की तैयारी है।
चुनाव के मद्देनजर होगा होमवर्क
तीन साल से ज्यादा समय से जिलों में जमे सभी अफसरों को बदला जाएगा। चुनाव से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े अधिकारी बदलेंगे। कार्मिक विभाग ने इसके लिए सभी विभागों को एक्सरसाइज कर सूची भेजने को कहा है।
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दिसम्बर में पंचायत चुनाव की आचार संहिता लागू हो जाएगी। जैसे ही जनवरी तक चुनाव प्रक्रिया पूरी होगी उसके बाद लोकसभा चुनाव का बिगुल भी बज उठेगा। माना यही जा रहा है कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आचार संहिता समाप्त होने और लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू होने केदरमयान काफी कम समय रहेगा।
इसलिए उच्च स्तर पर लगभग यह तय हो चुका है कि पंचायत चुनाव की आचार संहिता से पहले ही व्यापक फेरबदल कर दिया जाए। लोकसभा चुनाव के लिए केंद्रीय निर्वाचन आयोग की स्पष्ट गाइडलाइन है कि किसी भी जिले में तीन साल से ज्यादा समय से जमे अफसरों को बदला जाएगा। उसी की तैयारी शासन में शुरू हो गई है।
पुलिस में बड़ी संख्या में हैं ऐसे अफसर
ऐसे भी तमाम अफसर हैं जो कि नायब तहसीलदार से एसडीएम बनने पर भी एक ही जिले में जमे हैं। ऐसे अफसरों का सभी पदों पर तैनाती का कार्यकाल जोड़ा जाएगा। पुलिस में बड़ी संख्या में ऐसे अफसर हैं जिन्हें बदल दिया जाएगा। हालांकि जिलाधिकारी व पुलिस कप्तानों में अभी ऐसा कोई अफसर नहीं है जिसे एक ही जिले में जमे कई साल हो गए हों।
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निचले अफसरों की सूची तैयार हो रही है। अन्य विभागों के अफसरों को भी इसलिए हटाया जाएगा क्योंकि चुनाव में उन्हें सेक्टर व जोनल मजिस्ट्रेट बनाया जाता है।
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